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![]() एक नज़र वक़्त बीतते पता नहीं चलता..कभी-कभी लगता है कि बस चंद माह पहले की ही बात है कि लोग तहे दिल से वर्ष 2007 का स्वागत कर रहे थे. लेकिन इन चंद महीनों में सिमटे घटनाचक्र को देखें तो एहसास होता है कि लम्हा-लम्हा इस दौरान दुनिया नित नई शक़्ल अख़्तियार करती गई. हम यहाँ बात करेंगे कला जगत की. वो कला जो सतरंगी है- जिसमें फ़ैशन का ग्लैमर है, फ़िल्मी दुनिया है, कूची से निकले रंग है,साहित्य की गहराइयाँ है और वो जो बिछड़ गए उनकी परछाइयाँ हैं. वो साल जिसमें चक दे इंडिया एक फ़िल्म ही नहीं जैसे एक नया नारा बन गया, वो साल जिसमें जाने-माने फ़िल्म निर्देशक मार्टिन स्कोर्सेज़ी को आख़िरकर ऑस्कर नसीब हो ही गया-1981 के बाद पाँच दफ़ा ऑस्कर पाने की दहलीज़ पर आकर निराश होने के बाद.
वो साल जिसमें रियलिटी शो जैसे छोटे पर्दे के मूलमंत्र बन गए और ऐसे ही एक अंतरराष्ट्रीय रियलिटी शो बिग ब्रदर की विजेता बनी अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी. साहित्य में महिलाओं का दबदबा रहा- नोबेल पर क़ब्ज़ा हुआ लेखिका डॉरिस लैसिंग का तो बुकर पुरस्कार जीता लेखिका ऐन एनराइट ने. उधर चीन ने दिखाया कि उसके पास आर्थिक शक्ति ही नहीं, सौंदर्य भी भरपूर है उसके यहाँ. चीन की झांग जी के सर सजा मिस वर्ल्ड का ताज. कलाकारों का सम्मान हुआ तो कभी-कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज आमने-सामने खड़े भी दिखाए दिए....मसलन बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन का मामला. हँसी-खुशी, तनाव और गौरव के इन पलों के बीच ऐसे लम्हे भी आए जो आँख नम करके चले गए. साहित्यकार कमलेश्वर और फ़िल्मकार जीपी सिप्पी ने दुनिया को अलविदा कहा तो संगीतकार ओपी नैयर जग सूना कर चले गए, वहीं ऑपेरा गायक पावरोत्ती के प्रशंसकों ने उन्हें नम आँखों से विदाई दी. कला जगत ने वर्ष 2007 में कई खट्टे-मीठे पलों का स्वाद भी चखा- ऐश-अभिषेक की शादी, ब्रिटनी स्पीयर्स के कारनामे, शाहरुख खान का सिक्स पैक, तो कभी कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते संजय दत्त और सलमान खान जैसे सितारे. वर्ष 2007 में कला जगत के इन्हीं चंद लम्हों को क़ैद करती बीबीसी संवाददाता वंदना की विशेष प्रस्तुति. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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