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शुक्रवार, 10 अगस्त, 2007 को 01:52 GMT तक के समाचार
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'चक दे इंडिया' का लंदन में प्रीमियर

चक दे इंडिया
चक दे इंडिया का प्रीमियर लंदन में हुआ
चक दे इंडिया… इनदिनों अगर आप लंदन आएँ तो लगेगा वाकई हर जगह इंडिया की ही धूम है. इसकी ताज़ा मिसाल लंदन में एक बार फिर देखने को मिली जब बॉलीबुड के बादशाह शाहरुख़ खान की नई फ़िल्म 'चक दे इंडिया' का भव्य प्रीमियर हुआ.

'चक दे इंडिया' की कहानी भारत और भारतीय महिला हॉकी टीम और उनकी मुश्किलों पर केंद्रित है. वैसे शाहरुख़ के प्रशंसक आमतौर पर उन्हें फ़िल्म में हीरोइन के साथ रोमांस करते, हाथ में गिटार लिए नाचते-इठलाते या फिर किसी विलेन की पिटाई करते ही देखते रहें हैं.

लेकिन अपनी लवर बॉय रोमांटिक छवि से बिल्कुल अलग शाहरुख़ फ़िल्म में हॉकी टीम के कोच के रोल में है. तो बिना किसी ग्लैमरस हीरोइन वाली, बिना नाच-गाने वाली हॉकी पर बनी इस अलग सी फ़िल्म में आख़िर क्यों काम किया शाहरुख ने.

 मैं फ़िल्म करता हूँ अगर मुझे कहानी अच्छी लग जाए. मुझे लगा कि ये हॉकी के ऊपर फ़िल्म है, लड़कियों के ऊपर है, उनकी जद्दोजहद की कहानी है.. मैं साल दो साल में ऐसी फ़िल्में करता रहता हूँ जो महिलाओं पर केंद्रित हों. मैने कभी ये नहीं सोचा कि इसमें गाना नहीं है, मुझे पता था कि गाने नहीं है. कभी-कभी ऐसा काम करना अच्छा लगता है जो हट के हो
शाहरुख़ खान

इस पर शाहरुख़ ने कहा, "गाना, हीरोइन... जिन चीज़ों का ज़िक्र आपने किया ये फ़िल्म का अहम अंग नहीं होती. ये तो सिर्फ़ फ़िल्म के स्क्रीनप्ले या उसे कैसै दर्शाया जाता है उसका हिस्सा होती हैं. मैं फ़िल्म करता हूँ अगर मुझे कहानी अच्छी लग जाए. मुझे लगा कि ये हॉकी के ऊपर फ़िल्म है, लड़कियों के ऊपर है, उनकी जद्दोजहद की कहानी है.. मैं साल दो साल में ऐसी फ़िल्में करता रहता हूँ जो महिलाओं पर केंद्रित हों. मैने कभी ये नहीं सोचा कि इसमें गाना नहीं है, मुझे पता था कि गाने नहीं है. कभी-कभी ऐसा काम करना अच्छा लगता है जो हट के हो."

शाहरुख़ ने कहा कि महिलाएँ ज़्यादा मेहनतकश होती हैं और ये फ़िल्म उन्हीं को समर्पित है.

'फ़िल्म से हॉकी की दशा नहीं बदलेगी'

शाहरुख़ स्वयं हॉकी के खिलाड़ी रहे हैं और कॉलेज के ज़माने में खूब हॉकी खेलते भी रहे हैं.

हालांकि शाहरुख़ बहुत साफ़गोई से ये बात मानते हैं कि एक फ़िल्म से न तो राष्ट्रीय खेल हॉकी की दशा बदल सकती है न दिशा.

शाहरुख़ ने कहा, " मैं नहीं मानता कि एक फ़िल्म से किसी खेल का भविष्य बदल जाएगा. ऐसा ख़्याल नहीं है हमें कि इस फ़िल्म से राष्ट्रीय खेल मशहूर हो जाएगा और लोग सड़कों पर उतर आएँगे. दुर्भाग्यवश मुझे नहीं लगता कि फ़िल्मों का इतना असर होता है कि उन्हें देखने के बाद आप अपनी जीवनशैली ही बदल डालें."

फ़िल्म का प्रीमियर 18वें सदी में बने भव्य सॉमरसेट हाउस में ओपन एयर थिएटर में हुआ जहाँ शाहरुख़ के करीब दो हज़ार प्रशंसक इकट्ठा हुए.

फ़ैन्स की दीवानगी ऐसी कि लंदन तो लंदन, फ़्रांस और स्विट्ज़रलैंड से ये लोग ख़ास शाहरुख़ को देखने आए थे. और उन्हें देने के लिए फूल भी लाए हुए थे.

 शाहरुख़ में कुछ ऐसी बात है कि आपका बस ही नहीं रहता ख़ुद पर, कुछ जादू है उनमें जैसे किसी ने काला जादू कर दिया हो.
जोई, शाहरुख़ की प्रशंसक

स्विटज़रलैंड से आई उषी ने बताया, "मैं एक दिन पहले से ही आ गई थी शाहरुख़ को देखने की हसरत में, मैं उनकी बड़ी प्रशंसक हूँ."

वहीं टूटी फूटी हिंदी बोलती जोई का कहना था, "शाहरुख़ में कुछ ऐसी बात है कि आपका बस ही नहीं रहता ख़ुद पर, कुछ जादू है उनमें जैसे किसी ने काला जादू कर दिया हो."

लंदन के यूसुफ़ ने तो शाहरुख़ की तारीफ़ में कविता ही गढ़ डाली- दिलों की गलियों में कभी ग़म न हो, हमारी ये दोस्ती कभी कम न हो.

इन दिनों लंदन में भारत पर केंद्रित विशेष आयोजन 'इंडिया नाओ' चल रहा है और चक दे इंडिया का प्रीमियर इसी के तहत लंदन में आयोजित किया गया था.

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