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मंगलवार, 08 मई, 2007 को 20:00 GMT तक के समाचार
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'लाइफ़ इन ए मेट्रो' का लंदन में प्रीमियर

शिल्पा
बिग ब्रदर में शिल्पा के साथ हिस्सा लेने वाली डेनियला भी प्रीमियर में आईं
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में फ़िल्म निर्देशक अनुराग बासु की फ़िल्म लाइफ़ इन ए मेट्रो का प्रीमियर यहाँ के मशहूर लेस्टर स्कवेयर में आयोजित किया गया.

मंगलवार को फ़िल्म के प्रीमियर में कई जानी मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया लेकिन सबके आकर्षण का केंद्र रहीं शिल्पा शेट्टी जिनकी फ़िल्म में अहम भूमिका है.

यूँ तो प्रतिष्ठित लेस्टर स्कवेयर में सैकड़ों हॉलीवुड फ़िल्मों का प्रीमियर हो चुका है लेकिन लाइफ़ इन ए मेट्रो पहली हिंदी फ़िल्म है जिसका प्रीमियर यहाँ आयोजित हुआ है.

विदेश में इतने बड़े पैमाने पर किसी हिंदी फ़िल्म के रिलीज़ होने पर शिल्पा ने कहा, "ये अपने आप में ऐतिहासिक है और मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारी फ़िल्म है और हमें ये मौका दिया गया है. मैं बस यही उम्मीद करती हूँ कि फ़िल्म लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती है."

 "लंदन में इस तरह किसी हिंदी फ़िल्म का बड़े पैमाने पर प्रीमियर होना अपने आप में ऐतिहासिक है और मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारी फ़िल्म है और हमें ये मौक़ा दिया गया है. मैं बस यही उम्मीद करती हूँ कि फ़िल्म लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती है
शिल्पा शेट्टी

ब्रिटेन के टीवी शो बिग ब्रदर में जीतने के बाद ये शिल्पा की पहली बड़ी फ़िल्म है.

प्रीमियर में बिग ब्रदर में शिल्पा की सह-प्रतियोगी डेनियला भी पहुँची. बिग ब्रदर में शिल्पा के प्रति जेड गुडी, जो और डेनियला के कथित नस्लवादी बर्ताव को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

डेनियला को लेकर हुए विवाद के बारे में शिल्पा ने कहा कि ये सब अतीत की बात है और वे उसे भूल चुकी हैं.

इसके अलावा प्रीमियर में फ़िल्म के निर्माता रॉनी स्क्रूवाला, जॉन अब्राहम, गुरिंदर चढ्ढा, शिल्पा के पीआर मैनेजर मैक्स क्लिफ़र्ड, शमिता शेट्टी और शिल्पा की माँ भी पहुँची.

'वास्तविकता के करीब'


'लाइफ़ इन ए मेट्रो' की कहानी मुंबई में रहने वाले चंद लोगों की कहानी जो शहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में अकेले हैं और जिन्हें प्यार की तलाश है.

फ़िल्म में शिल्पा के अलावा शाइनी अहूजा, कोंकना सेन शर्मा, इरफ़ान खान, शरमन जोशी, कँगना रनावत और केके मेनन भी हैं.

निर्देशक अनुराग बासु इससे पहले मर्डर और गैंगस्टर जैसे फ़िल्में बना चुके हैं और उनका कहना है कि 'लाइफ़ इन ए मेट्रो' उससे काफ़ी अलग है और असल ज़िंदगी के करीब है.

 मर्डर और गैंगस्टर बनाने के बाद मैं सोच रहा था कि क्या करूँ. तो मैने सोचा कि आम आदमी गैंगस्टर नहीं है, क़त्ल नहीं करता लेकिन हम सबकी ज़िंदगी में काफ़ी ड्रामा होता है. लाइफ़ इन ए मेट्रो एक कोशिश है उसी ड्रामे को फ़िल्मी पर्दे पर उतारने की
अनुराग बासु

इस फ़िल्म को बनाने के पीछे के मकसद के बारे में अनुराग बताते हैं, "मर्डर और गैंगस्टर बनाने के बाद मैं सोच रहा था कि क्या करूँ. तो मैने सोचा कि आम आदमी गैंगस्टर नहीं है, क़त्ल नहीं करता लेकिन हम सबकी ज़िंदगी में काफ़ी ड्रामा होता है. लाइफ़ इन ए मेट्रो एक कोशिश है उसी ड्रामे को फ़िल्मी पर्दे पर उतारने की."

ये पूछे जाने पर कि ब्रिटेन में शिल्पा की लोकप्रियता को देखते हुए उनके रोल को लंबा किया गया है तो अनुराग बासु ने कहा कि फ़िल्म की कहानी और किसी भी किरदार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई.

शिल्पा की लोकप्रियता से फ़िल्म को पहुँचने वाले फ़ायदे पर अनुराग बासु और ख़ुद शिल्पा का कहना था कि आख़िर में वही फ़िल्म चलती है जिसमें दम है पर साथ ही कहा कि अगर इससे कोई फ़ायदा पहुँचता है कुछ ग़लत भी नहीं है.

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