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नज़रें शाहरुख़ के नए अवतार पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस समय लाख टके का सवाल यह है कि क्या 'कौन बनेगा करोड़पति' में शाहरुख़ ख़ान लोगों को भा रहे हैं? अमिताभ बच्चन से शाहरुख़ ख़ान की तुलना अभी ख़त्म नहीं हुई है. वह शायद कभी ख़त्म नहीं होगी. लेकिन अख़बारों के पहले पन्नों पर छपी ख़बरों के हवाले से देखें तो इस लोकप्रिय और पुराने कार्यक्रम पर शाहरुख़ का अपना रंग चढ़ने लगा है. ख़बरों के अनुसार लोग मान रहे हैं कि 'कौन बनेगा करोड़पति' को शाहरुख़ ख़ान धीरे-धीरे खींच ले जाएँगे. टेलीविज़न से अपना करियर शुरु करने वाले शाहरुख़ स्टार बनने के बाद पहली किसी टेलीविज़न कार्यक्रम में दिखाई दे रहे हैं. लेकिन संकट यह नहीं है. संकट यह है कि शाहरुख़ ख़ान को वह जगह भरनी है जो अमिताभ बच्चन ने खाली की है. ‘कंप्यूटरजी’ से लेकर ‘आर यू श्योर’ ‘लॉक कर दिया जाए’ तक कई मुहावरे अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के लिए रचे. शाहरुख़ ख़ान के सामने चुनौती यह भी है कि वे इन मुहावरों को किस तरह से अपनाते और बदलते हैं. कार्यक्रम के पहले दिन जो सफ़ाइयाँ शाहरुख़ ने दीं, उसने ज़ाहिर कर दिया कि अमिताभ बच्चन का जो साया ‘कौन बनेगा करोड़पति’ पर है उससे शाहरुख़ भयभीत तो बहुत हैं. अमिताभ की तरह शुद्ध हिंदी न बोल पाने की अपनी कमी को छिपाने के लिए शाहरुख़ ने बहाना बनाया कि ऐसी हिंदी लोगों को समझ में नहीं आती. अमिताभ के डिज़ाइनर कोट और कपड़ों पर अगर टिप्पणी नहीं करते तो कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था लेकिन शाहरुख़ को वह भी करना ज़रुरी लगा. शो के शुरुआती दौर में ऐसे कई अवसर आए हैं जब शाहरुख़ को अमिताभ की तुलना का सामना करना पड़ा है या अमिताभ का नाम लेना पड़ा है. शाहरुख़ ख़ान जैसे भी अभिनेता हों, जितनी बार भी शाहरुख़ ने अमिताभ बच्चन का नाम लिया, अपने चेहरे पर दिख रही असुविधा और तनाव के भाव को वह छिपा नहीं पाए. नए मुहावरे अमिताभ बच्चन की ख़ाली की हुई जगह को भरने की चुनौती से निपटने के लिए शाहरुख़ ख़ान कई नए मुहावरे रचने की कोशिश कर रहे हैं. वे ‘कंप्यूटरजी’ की जगह ‘कंप्यूटरदा’ और ‘कंप्यूटरताऊ’ तक बहुत कुछ बोलते हैं, लेकिन वह अख़रता नहीं है. अच्छा ही लगता है. प्रतियोगियों के साथ बातचीत में शाहरुख़ कुछ ज़्यादा समय दे रहे हैं और बीच-बीच में माहौल का तनाव कम करने के लिए चुटकुलेबाज़ी भी कर रहे हैं और अच्छी तरह कर रहे हैं. प्रतियोगियों की उनकी भाषा में, चाहे वह बांग्ला हो या फिर तेलुगु या फिर हरियाणवी, शाहरुख़ की चुहलबाज़ियाँ भी लोगों को जँच ही रही है.
लेकिन अमिताभ से अलग होने की कोशिश में शाहरुख़ जब एक प्रतियोगी के कंधे को सहलाने पहुँचे तो वह ख़ुद भी सहज नहीं थे और उनकी ‘बॉडी लैंग्वेज’ इस बात की शिकायत कर रही थी कि वह स्वाभाविक या एकाएक लिया हुआ निर्णय नहीं था. अलबत्ता एक प्रतियोगी को जब उन्होंने एकाएक अपनी घड़ी उतारकर दे दी तो दर्शकों को निश्चित तौर पर यह सुखद लगा होगा. लोगों को गुदगुदी होती है जब एक दक्षिण भारतीय प्रतियोगी को अपने सेक्सी होने का राज़ बताते हुए शाहरुख़ ख़ान कहते हैं, "डोसा-इडली बहुत खाता हूँ, जल्दी सो जाता हूँ, सिगरेट और शराब नहीं पीता और...झूठ बहुत बोलता हूँ." खेल को बीच में छोड़कर जाने वाले प्रतियोगियों से वे आग्रह कर तो रहे हैं कि बजाय यह कहने के कि वे खेल छोड़ना चाहते हैं, वे कहें कि ‘शाहरुख़ आपसे गले मिलना चाहता हूँ’. शाहरुख़ बिना झिझक प्रतियोगियों को गले भी लगा रहे हैं लेकिन तब क्या होगा जब कोई महिला प्रतियोगी सामने होगी और उसका पति या पिता पीछे बैठा होगा? चुनौती कोई माने या न माने अमिताभ बच्चन भारत की मनोरंजन की दुनिया के एक मिथक पात्र की तरह हैं. 'कौन बनेगा करोड़पति' के एंकर बनकर जब अमिताभ बच्चन टेलीविज़न के सामने आए थे तो वह पहला मौक़ा ही था जब लोग उनके व्यक्तित्व के एक नए पहलू से रुबरू हो रहे थे. लेकिन एक बार फिर उन्होंने अपना सिक्का जमा लिया और लोगों ने लगभग दीवानगी के साथ कार्यक्रम को देखा. ज़ाहिर है कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का प्रसारण करने वाले चैनल ‘स्टार प्लस’ को इससे भारी कमाई हुई. एक बार ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की कड़ियाँ ख़त्म हुईं और फिर दोबारा शुरु हुईं. लेकिन दूसरी बार इसे पूरा करने से पहले अमिताभ बच्चन बीमार हो गए. बाद में उन्होंने चैनल से माफ़ी माँग ली. इसके बाद स्टार प्लस ने अमिताभ बच्चन के विकल्प के के रुप में शाहरुख़ ख़ान को चुना और शाहरुख़ ख़ान ने एक अच्छे प्रोफ़ेशनल की तरह इस चुनौती को स्वीकार किया. फ़िल्मों में जब अमिताभ की ख़ाली की हुई जगह में शाहरुख़ को तो लोगों ने आसानी से स्वीकार कर लिया. क्योंकि उस समय वे व्यक्तिगत तौर पर न तो दोनों के अभिनय क्षमता की तुलना कर रहे थे और न उनके क़द की कोई तुलना थी.
ये और बात है कि आज भी बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान के वर्चस्व की तुलना करना मीडिया का प्रिय शगल है और हाल ही में एक प्रमुख समाचार पत्रिका ने अपनी कवर स्टोरी में इसकी चर्चा की थी. अख़बारों में इस तरह के फ़ीचर न जाने कितनी बार आ चुके हैं. लेकिन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में एक दूसरी तरह की तुलना है क्योंकि यह दो अभिनेताओं और उनके वर्चस्व से ज़्यादा दो व्यक्तियों और उनके व्यक्तित्वों की तुलना है. टेलीविज़न देखने वाली जनता के बीच पसंदगी की तुलना है. शाहरुख़ ऐसे समय में स्टार प्लस के इस लोकप्रिय कार्यक्रम में आए हैं जब चैनल के वो सभी आला अधिकारी चैनल को छोड़कर जा चुके हैं जो इस कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने की रणनीति बनाते रहे थे. दूसरे इस बात का पूरा ख़तरा शाहरूख़ ख़ान उठा रहे हैं कि यदि अमिताभ की तुलना में वे उन्नीस भी उतरे तो दर्शकों को टीवी बंद करने या चैनल बदलने में वक़्त नहीं लगेगा. शाहरुख़ ख़ान के पास समय कम है और चुनौतियाँ ज़्यादा. देखना है कि बॉलीवुड का बादशाह इसमें कितना खरा उतरता है. | इससे जुड़ी ख़बरें शाहरूख़ ने शुरू किया करोड़पति बनाना22 जनवरी, 2007 | पत्रिका 'शाहरुख़ हैं आज के नंबर वन अभिनेता'27 सितंबर, 2006 | पत्रिका बंद हुआ कौन बनेगा करोड़पति25 जनवरी, 2006 | पत्रिका अमिताभ बच्चन की टीवी पर वापसी05 अगस्त, 2005 | पत्रिका शाहरुख़ की सिगरेट छोड़ने की कोशिश15 नवंबर, 2005 | पत्रिका 'शाहरूख़ ख़ान का एक सपना...'05 जून, 2005 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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