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'शाहरुख़ हैं आज के नंबर वन अभिनेता' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक के बाद एक मिल रही सफलताओं से ख़ुश बॉलीवुड स्टार अभिषेक बच्चन मानते हैं कि जिस फ़िल्म में शाहरुख़ ख़ान हों उसमें किसी और अभिनेता को प्रमुख भूमिका की उम्मीद भी नहीं रखनी चाहिए. शाहरुख़ को अभी का नंबर वन अभिनेता बताने वाले अभिषेक पिछले दिनों लंदन में थे अपनी नई फ़िल्म उमराव जान के प्रचार प्रसार के लिए. इसी दौरान हुई उनसे विशेष मुलाक़ात. पेश है अभिषेक से हुई बातचीत के मुख्य अंश पिछली उमराव जान से ये उमराव जान किस तरह अलग होगी? इस सवाल का जवाब मैं नहीं दे सकता क्योंकि मैंने मुज़फ़्फ़र जी की उमराव जान देखी नहीं है. मगर इतना ज़रूर है कि ये फ़िल्म रीमेक नहीं है. ये मिर्ज़ा मोहम्मद अली रुसवा जी के उपन्यास पर ही दोबारा फ़िल्म बनाने की कोशिश है. फ़िल्म की पृष्ठभूमि लखनऊ की है, जहाँ नफ़ासत पर अब भी काफ़ी ज़ोर रहता है. ऐसे में वो लखनवी स्टाइल अपनाना कितना आसान या मुश्किल था? आसान तो बिल्कुल भी नहीं था मगर दिक़्क़त भी नहीं हुई क्योंकि जब जेपी दत्ता साहब डायरेक्टर हों तो वो सारा लहज़ा ख़ुद ही सँभाल लेते हैं. फिर जेपी साहब के पिता जी ओपी दत्ता जी भी वहाँ मौजूद रहते थे. फ़िल्म के डायलॉग उन्होंने ही लिखे हैं और चूँकि वो सेट पर ही मौजूद रहते थे तो जब भी एक शब्द ऐसा होता था जो हम ठीक से नहीं बोल रहे होते थे तो वो तुरंत आकर हमें डंडा मारकर उसे ठीक करा देते थे.
उमराव जान एक महिला प्रधान फ़िल्म है. पुरानी फ़िल्म की बात करें तो उसमें भी लोग रेखा को याद करते हैं, फ़ारुख़ शेख़ को उतना याद नहीं किया जाता. आपने ऐसी भूमिका क्यों स्वीकार की? देखिए जब जेपी साहब फ़िल्म बनाते हैं तो मैं उनसे सवाल नहीं पूछता. वो अगर मुझसे कह दें कि तुम चुपचाप एक कोने में खड़े हो जाओ तो उनके लिए मैं खड़ा हो जाऊँगा. उन्होंने मुझे इस फ़िल्म इंडस्ट्री में जन्म दिया है. मेरी पहली फ़िल्म रिफ़्यूजी उन्होंने ही डायरेक्ट की थी. मैं उनके लिए कोई भी रोल करने के लिए तैयार हूँ. कभी अलविदा ना कहना में भी प्रमुख भूमिका शाहरुख़ ख़ान और रानी मुखर्जी की थी. फिर वो फ़िल्म आपने क्यों की? जिस फ़िल्म में शाहरुख़ हों उस फ़िल्म में किसी और अभिनेता को ये उम्मीद रखनी भी नहीं चाहिए कि वो लीड ऐक्टर हो. मैं मानता हूँ कि शाहरुख़ हमारी इंडस्ट्री के आज के नंबर वन स्टार हैं और हमारे सीनियर भी हैं. फिर हमें इतना अनादरपूर्ण रवैया भी नहीं अपनाना चाहिए कि हम उनके सामने बराबरी के काम की उम्मीद रखें.
कभी अलविदा ना कहना के बारे में मुझे पहले दिन से ही बता दिया गया था कि ये एक सहयोगी कलाकार का रोल है. जहाँ तक बात है कि मैंने फ़िल्म क्यों स्वीकार की तो उसकी वजह ये हैं कि फ़िल्म के निर्देशक करण जौहर मेरे बड़े भाई हैं. उनके लिए मेरे दिल में सम्मान है और उन्हें मैं कभी मना नहीं कर सकता हूँ. फ़िल्म विवादास्पद कहानी पर आधारित है और शायद यही वजह है कि फ़िल्म की सेटिंग भारत से नहीं दिखाकर न्यूयॉर्क में दिखाई गई है. आप ख़ुद शादी के बारे में क्या सोचते हैं? मैं इस बारे में कुछ कह सकने की स्थिति में नहीं हूँ क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है. मैं तो इस मामले में पूरी तरह अनुभवहीन हूँ. आपकी फ़िल्में अब सफल हो रही हैं और दर्शकों के बीच आपकी लोकप्रियता भी बढ़ रही है. आपको लगता है कि बच्चन परिवार का जो एक ठप्पा आप पर था वो अब हट रहा है? मैंने कभी ये कोशिश नहीं की है कि जैसा आप कह रहे हैं बच्चन परिवार का ठप्पा उससे मैं बाहर निकलूँ. मेरे लिए तो ये बड़े ही गर्व की बात है कि मेरे नाम में बच्चन जुड़ा है. ये मुझे मेरे दादा जी, मेरे पिता जी से मिला है. मैं उम्मीद करता हूँ कि मैं उनका सिर गर्व से ऊँचा रख पाऊँगा. मगर तुलना जो हो रही थी शुरू से...... जी देखिए, तुलना तो हमेशा ही होने वाली है. मैं उनका बेटा हूँ तो तुलना होती आई है, होती रहेगी. मगर मेरा मानना है कि तुलना किससे हो रही है. मेरे हिसाब से इस इंडस्ट्री के सबसे उम्दा ऐक्टर से हो रही है. मेरे हिसाब से दुनिया के सबसे महान कलाकार से हो रही है. यानी आप अच्छी संगत में हैं इसलिए शिकायत नहीं करनी चाहिए. एक समय था जब आपकी फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर चलती नहीं थीं और अब आप इंडस्ट्री के शिखर पर बढ़ रहे हैं. इस पूरे दौर में आपके परिवार ने आपका किस तरह साथ दिया है?
हर तरह समर्थन मिला. मैं तो बहुत भाग्यशाली हूँ क्योंकि मेरे परिवार ने कभी ये नहीं कहा कि भइया देखो तुम्हारी फ़िल्में नहीं चल रही हैं, तुम्हें ऐक्टिंग नहीं आती. उन्होंने हमेशा कहा कि उठो, जाओ और अपना बेहतरीन प्रदर्शन करो. मेरे ख़्याल से इससे अच्छी सलाह और क्या हो सकती है. मैं जब भी किसी सीन में फँसता हूँ, सीधे डैड को फ़ोन करता हूँ. बोलता हूँ कि डैड मैं फँस गया हूँ कैसे करूँ ये सीन. ब्रिटेन से निकलने वाले एशियाई समाचार पत्र ईस्टर्न आई ने प्रिंयका चोपड़ा को सबसे सेक्सी एशियाई महिला कहा है. दूसरे नंबर पर बिपाशा बसु और तीसरे पर ऐश्वर्या राय हैं. आपकी टॉप थ्री लिस्ट क्या होगी? आप पिटवाएँगे मुझे. मैं किसी एक का नाम ले लूँ तो बाक़ी मुझे पीटेंगी. मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहूँगा. मेरे विचार से तो जया बच्चन को नंबर वन होना चाहिए. उमराव जान में आपके साथ ऐश्वर्या हैं, धूम-2 में भी ऐश्वर्या हैं और मणिरत्नम की गुरु में भी ऐश्वर्या. आपको नहीं लगता कि इससे आपके और ऐश्वर्या को लेकर जो अफ़वाह है उसे और बल मिलेगा? मैं इस बारे में सोचता नहीं हूँ. अगर निर्देशक ठीक समझे कि किसी अभिनेत्री को उन्हें लेना है तो वो उनका काम है मेरा नहीं. मैं एक अभिनेता हूँ, मेरे साथ कौन काम करेगा ये निर्माता निर्देशक की मर्ज़ी है. मैं ऐसा कलाकार नहीं हूँ जो इस बारे में सलाह देगा क्योंकि ये मेरा काम नहीं है, मेरा काम है ऐक्टिंग करना. वैसे ऐश्वर्या के साथ आपका नाम जोड़ते हुए जो अफ़वाहें हैं उनके बारे में आपका क्या कहना है? उन पर ध्यान नहीं दिया जा सकता. उसका कोई मतलब नहीं है. आपको काम पर ध्यान देना होगा. जैसा मैंने कहा कि अगर आप ये सोचने लगे कि ये ऐसी बात कर रहा है वो वैसी बात कर रहा है तो आप काम पर ध्यान नहीं दे पाएँगे. हम तो कलाकार हैं काम करने आए हैं, लोगों का मनोरंजन करना मेरा काम है तो इन बकवास बातों के बजाए मैं काम पर ध्यान दूँगा. |
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