अफ़ग़ान चरमपंथी वार्ता की मेज़ पर

अफ़ग़ानिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और कबायली नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार धड़े के चरमपंथियों ने सरकार के साथ शांति वार्ता शुरु कर दी है.
अफ़ग़ान अधिकारियों के मुताबिक तालेबान के बाद इस दूसरे सबसे बड़े चरमपंथी संगठन हिज़्बे इस्लामी के प्रतिनिधियों ने राजधानी काबुल में राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात की है.
हिज़्बे इस्लामी ने इससे पहले शांति के लिए एक प्रारुप पेश किया था.
हिज़्बे इस्लामी की ओर से क़ुतबुद्दीन हेलाल ने बातचीत में हिस्सा लिया.
अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के प्रवक्ता वहीद उमर ने कहा, "मैं इसकी पुष्टि करता हूँ कि हिज़्बे इस्लामी का एक प्रतिनिधिमंडल काबुल में है. वो एक योजना के साथ आए हैं".
हालाँकि उन्होंने विस्तार से कुछ भी बताने से इनकार कर दिया.
हिज़्बे इस्लामी के नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार के प्रवक्ता वली उल्ला ने इससे पहले बताया था कि वो 15 सूत्रीय शांति योजना के साथ काबुल पहुँचे हैं जिसमें विदेशी सेना को हटाने की माँग शामिल है.
तालेबान के साथ झड़प
इस संगठन ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो और अफ़ग़ान सेनाओं के ख़िलाफ़ कई बार हमले किए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सेना की मौजूदगी के विरोध में हिज़्बे इस्लामी और तालेबान ने एक समय हाथ मिला लिए थे लेकिन अब दोनों के रिश्ते बिगड़ चुके हैं.
हाल ही में बाग़लान प्रांत में तालेबान और हिज़्बे इस्लामी के बीच झड़पें हुई थीं जिनमें कम से कम 60 चरमपंथी मारे गए थे.
ख़बरों के मुताबिक दोनों के बीच गाँवों पर नियंत्रण और ग्रामीणों से टैक्स वसूलने पर मतभेद पैदा हो गए थे.
अफ़ग़ानिस्तान में हिकमतयार बहुत ही विवादास्पद व्यक्ति रहे हैं लेकिन वर्ष 2007 में ही उन्होंने शांति वार्ता की पेशकश की थी.
सोवियत संघ के हमले के समय अमरीका की ओर से उन्हें काफ़ी मदद मिली थी लेकिन बाद में वो ओसामा बिन लादेन के साथ हो गए और अमरीका ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया.












