BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

Kareena Kapoor

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हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ रहे होंगे.

हम जानते हैं कि व्यस्तता के बीच आपके लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हैं.

लाल सिंह चड्ढा के लिए करीना कपूर को क्यों देना पड़ा था ऑडिशन

साल 2000 में जे पी दत्ता की फ़िल्म "रिफ़्यूज़ी" से अपने करियर की शुरुआत करने वालीं करीना कपूर ख़ान ने हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में अपने 22 साल पूरे कर लिए हैं. इन 22 सालों में करीना कपूर ने अपनी सफ़लता और स्टारडम बरकरार रखा है.

करीना का मानना है कि आज फ़िल्मों में स्टार मायने नहीं रखते और अब फार्मूला फ़िल्में नहीं चलेंगी.

करीना कपूर ने आज तक कोई ऑडिशन नहीं दिया पर आमिर ख़ान ने फ़िल्म लाल सिंह चड्ढा के लिए करीना कपूर का पहली बार ऑडिशन लिया क्योंकि वह कास्टिंग को लेकर सुनिश्चित होना चाहते थे.

करीब एक दशक बाद आमिर ख़ान के साथ फिर काम करने जा रहीं करीना ने कहा कि आमिर ख़ान उन सितारों में से नहीं हैं जो कहें कि मैं फ़िल्म में हूँ, तो फ़िल्म करनी पड़ेगी.

उनके मुताबिक़ आमिर ख़ान फ़िल्म के लिए समर्पित हैं और जो फ़िल्म के लिए सही होता है, वही करते हैं. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

चीन-ताइवान विवाद

ताइवान और चीनः नैंसी पेलोसी की यात्रा से तनाव, क्या है इनके बीच का विवाद

चीन और अमेरिका के बीच अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर तनाव पैदा हो गया है.

पिछले 25 सालों में ये अमेरिका के किसी उच्चस्तरीय राजनेता की ये पहली ताइवान यात्रा है.

चीन ने पेलोसी की ताइवान यात्रा को "बहुत ख़तरनाक" बताया है.

चीन के उप-विदेश मंत्री शी फ़ेंग ने इसे विद्वेषपूर्ण बताते हुए गंभीर परिणाम की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि चीन हाथ-पर-हाथ धरे नहीं बैठा रहेगा.

वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि नैंसी पेलोसी की यात्रा चीन की वन-चाइना पॉलिसी के अनुरूप है और इसे संकट में बदलने की कोई ज़रूरत नहीं है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

अमुधा

अमुधा: हौसले और हिम्मत की मिसाल पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी

हिम्मत और जज़्बे से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है, तमिलनाडु की रहने वाली अमुधा इस बात का जीता जागता उदाहरण हैं.

5 साल की उम्र में एक हादसे में उनका एक पैर चला गया, पर इसके बावजूद अमुधा ने हार नहीं मानी.

उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. देखिए बीबीसी संवाददाता नवीन की रिपोर्ट.

सर्जरी और कई हफ़्तों के इलाज के बाद मिहिर जैन का वज़न 237 किलो से घटकर 165 किलो हो गया था

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इमेज कैप्शन, सर्जरी और कई हफ़्तों के इलाज के बाद मिहिर जैन का वज़न 237 किलो से घटकर 165 किलो हो गया था

भारत में बच्चों में मोटापा बन सकता है महामारी

भारत दुनियाभर में उम्र के मुक़ाबले छोटे क़द के बच्चों के मामले में बहुत पहले ही शीर्ष पर था. अब भारत में बच्चों में मोटापा चिंताजनक स्तर तक बढ़ गया है और विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि इससे तुरंत नहीं निबटा गया तो ये महामारी का रूप भी ले सकता है.

14 साल के मिहिर जैन जब साल 2017 में व्हीलचेयर पर बैठकर दिल्ली के मैक्स अस्पताल में बेरिएट्रिक सर्जन डॉ. प्रदीप चौबे से सलाह लेने पहुंचे तो डॉक्टर को अपनी आंखों पर यक़ीन नहीं हुआ.

डॉ. चौबे याद करते हैं, "मिहिर बहुत ज़्यादा मोटे थे, वो सही से खड़े नहीं हो पाते थे और बमुश्किल अपनी आंखें खोल पाते थे. उनका वज़न 237 किलो था और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 92 था."

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यदि बीएमआई 25 से ऊपर हो तो व्यक्ति को मोटा माना जाता है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

विश्व स्तनपान सप्ताह: ब्रेस्ट मिल्क क्यों फॉर्मूला मिल्क से बेहतर है?

'मैं यह मानती हूं कि मां का दूध ही बच्चे के लिए सबसे बेहतर होता है. मैं मजबूरी में बच्चे को फॉर्मूला मिल्क पिलाती हूं क्योंकि मुझे बच्चे की ज़रूरत के लिहाज़ से पर्याप्त दूध नहीं होता.''

दिल्ली की रहने वाली प्रणिता ने करीब चार महीने पहले बच्चे को जन्म दिया. यह उनका पहला बच्चा है. वह अपने बच्चे को फॉर्मूला मिल्क पिलाती हैं क्योंकि उन्हें शिशु की ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त दूध नहीं होता. वह डॉक्टर की मदद भी ले रही हैं ताकि उनकी इस समस्या का समाधान हो सके.

प्रणिता को इस बात का अफ़सोस है कि स्तनपान के बारे में वह जागरूक नहीं थीं और बच्चे के जन्म के तत्काल बाद दूध पिलाने में नर्स ने उनकी कुछ ज़्यादा मदद भी नहीं की.

वहीं गुरुग्राम की नितिका का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चे को छह महीने तक स्तनपान ही कराया, जिसकी वजह से वह बच्चे के विकास को लेकर आश्वस्त हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 0-6 महीने तक के शिशु को सिर्फ़ और सिर्फ़ मां का दूध ही पिलाने की सिफ़ारिश करता है. लेकिन फिर भी हमारे आस-पास स्तनपान और ब्रेस्ट मिल्क को लेकर बहसें होती हैं. कई बार कुछ ऐसी बातें कही जाती हैं, जिसका कोई आधार नहीं होता. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

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