'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के पोस्टर में नेहरू की तस्वीर नहीं, कांग्रेस ने उठाए सवाल

इमेज स्रोत, ICHR.AC.IN
भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा जारी 'आजादी का अमृत महोत्सव' के पोस्टर पर विवाद खड़ा हो गया. पोस्टर पर नेहरू की तस्वीर न होने को लेकर कई कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई है.
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने आईसीएचआर की वेबसाइट का एक स्क्रीन शॉट शेयर किया है. इसमें एक पोस्टर पर महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, बीआर आंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय और वीर सावरकर की तस्वीरें हैं.
लेकिन इस पोस्टर में नेहरू की तस्वीर नहीं है.
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक ट्वीट कर लिखा, "ये सिर्फ़ निंदनीय नहीं, बल्कि इतिहास के ख़िलाफ़ भी है कि आज़ादी का जश्न भारतीय आज़ादी की महत्वपूर्ण आवाज़ रहे जवाहरलाल नेहरू को हटाकर मनाया जाए. एक बार फिर, आईसीएचआर ने खुद का नाम ख़राब किया है. ये एक आदत बनती जा रही है!"
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
कांग्रेस के कई दूसरे नेताओं ने भी थरूर के ट्वीट को रिट्वीट किया.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश में ने भी थरूर के ट्विट को रिट्विट कर सरकार की आलोचना की.
कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने लिखा, "देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आज़ादी का अमृत महोत्सव में नाम नहीं होने से उनकी शख़्सियत कमज़ोर नहीं हो जाती. ये बस बताता है कि पीएम और बीजेपी नेहरू की विरासत से कितना डरते और घबराते हैं. इस तरह की असुरक्षा की भावना पीएम को शोभा नहीं देती."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव गोगोई ने लिखा, "कौन सा दूसरा ऐसा देश होगा जो आज़ादी की लड़ाई से जुड़ी वेबसाइट से देश के पहले प्रमुख को हटा देगा. आईसीएचआर का पंडित नेहरू और अबुल कलाम आज़ाद की तस्वीरों को हटाना, छोटी सोच और अन्याय है. भारत ये नहीं भूलेगा कि आरएसएस ने आज़ादी की लड़ाई से दूर रहने का फ़ैसला किया था."
दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी निशाना साधा
दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी इस मामले में पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा है.
तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने लिखा, "नरेंद्र मोदी को पता है कि वो कोई विरासत छोड़कर नहीं जाएंगे. इतिहास उन्हें एक कमज़ोर, अहंकारी व्यक्ति की तरह याद रखेगा, जिन्होंने अपने फ़ायदे के लिए देश को बेचने और बर्बाद करने की कोशिश की. नेहरू और मौलाना आज़ाद को मिटाने के लिए मोदी बहुत छोटे हैं."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
ट्विटर पर कई लोगों ने कांग्रेस के समर्थन में ट्वीट किया तो कई लोगों ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए याद दिलाया कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को याद किया था.
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, "आईसीएचआर के पोस्टर से नेहरू की तस्वीर हटाई जा सकती है लेकिन न तो आज़ादी के आंदोलन में उनके योगदान को भुलाया जा सकता है और न ही आधुनिक भारत के निर्मता के तौर पर उनकी छवि को मिटाया जा सकता है."
ऋचा वृक्ष नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "आईसीएचआर को बीच में देश के प्रथम प्रधानमंत्री की तस्वीर लगानी थी. इतिहास पर शोध करने वालों से ऐसी ग़लती."
कुनाल जाधव नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "केवल इसलिए कि पोस्टर में नेहरू की तस्वीर नहीं है और सावरकर की है, लोग बीजेपी सरकार की तुलना तालिबान से कर रहे हैं."
किसी के योगदान को कम करने का इरादा नहीं: आईसीएचआर
इस बारे में आईसीएचआर के अध्यक्ष ओम जी उपाध्याय ने टीवी चैनल टाइम्स नाऊ से हुई बातचीत में कहा, "उनकी संस्था का इरादा किसी को कमतर साबित करने का नहीं है. लेकिन ये ज़रूर है कि हमने उन व्यक्तित्वों को पोस्टर में जगह दी है, जिनके योगदान को अब तक ख़ास महत्व नहीं मिला."
उन्होंने यह भी कहा कि "अभी केवल आठ ही चेहरों को पोस्टर में जगह मिली है, जब 16 या 24 चेहरे सामने आएंगे तो उसमें नेहरू हो सकते हैं."
वहीं, आईसीएचआर की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने शशि थरूर पर हमला बोला है. उन्होंने कहा, "थरूर को कुछ बातें भूलने की बीमारी है. अभी 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने जवाहरलाल नेहरू के योगदान की चर्चा की थी. वे शायद ये मानते हैं कि किसी को याद करने का एकमात्र तरीका पोस्टर ही है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















