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रमज़ान मुबारक कहने के लिए मैं दो बार क्यों सोचूं?: क्रिकेटर मनोज तिवारी-सोशल
- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'रमदान मुबारक. आपका रमदान ख़ुशनुमा और दुआओं से भरपूर हो.'
भारतीय क्रिकेट मनोज तिवारी ने शुक्रवार को यह ट्वीट किया और साथ में अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की. यही तस्वीर उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से भी शेयर की है.
तस्वीर में वो इस्लामी पोशाक में नज़र आ रहे हैं. टोपी लगाए और दोनों हाथ उठाकर ऊपर देखते हुए दुआ मांगते मनोज तिवारी की यह तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. वायरल होने के साथ ही इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं.
मनोज तिवारी को बहुत से लोगों की ट्रोलिंग और भद्दे कमेंट्स का शिकार भी होना पड़ रहा है.
कुछ लोग उनके इस्लामपरस्त होने की बात कह रहे हैं, कुछ कह रहे हैं कि उन्होंने 'सस्ती लोकप्रियता' पाने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो कुछ पूछ रहे हैं कि शायद वो राजनीति में क़दम रखना चाहते हैं.
इसके कुछ घंटों बाद मनोज ने एक और पोस्ट की. इसमें उनकी कई तस्वीरें हैं और वो अलग-अलग धर्मों के त्योहारों पहने जाने वाले परंपरागत पोशाक में नज़र आ रहे हैं.
मसलन, एक तस्वीर में वो हाथों में दीयों की थाली लिए, एक में रंगों की थाली लिए, एक में सैंटा क्लॉज़ की ड्रेस पहने हुए और एक में बैसाखी की पोशाक में नज़र आ रहे हैं.
इन तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा:
छोड़कर ये हिंदू-मुस्लिम
ग़रीबी भी देख लो,
कहां तुम अब तक अटके हुए हो?
हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने को तुम ,
देशभक्ति कहते हो,
शायद तुम कहीं भटके हुए हो.
इसके साथ ही मनोज तिवारी ने लिखा, "अगर आप इंसान हैं तो सभी धर्मों का सम्मान कीजिए."
10-12 साल पुरानी है ये तस्वीर
हालांकि इसके बावजूद लोग उनको ट्रोल करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं. बीबीसी हिंदी से बातचीत में मनोज तिवारी ने बताया कि असल में ये तस्वीर 10-12 साल पुरानी है जो एक ब्रैंड के फ़ोटोशूट के दौरान ली गई थी.
उन्होंने कहा, "इस तस्वीर को पोस्ट करने से पहले मैंने ज़्यादा कुछ सोचा नहीं था. मैंने अमिताभ बच्चन का ट्वीट देखा जिसमें उन्होंने रमज़ान की मुबारकबाद देते हुए फ़िल्म कुली की एक तस्वीर पोस्ट की थी. संयोग से मुझे अपने फ़ोन में ये फ़ोटो मिल गई और मैंने इसे पोस्ट कर दिया."
मनोज कहते हैं, "मैंने तस्वीर पोस्ट करते समय ऐसा कुछ सोचा नहीं था. और मुझे सोचना भी क्यों चाहिए? किसी त्योहार पर मुबारक़बाद देने के लिए मुझे दो बार क्यों सोचना चाहिए? मेरे बहुत से मुसलमान दोस्त हैं. मैं उन सभी को मुबारक़बाद देना चाहता था इसलिए मैंने ये फ़ोटो पोस्ट कर दी. मुझे ज़रा भी नहीं लगा था कि इस पर इतना बवाल मच जाएगा."
इस तरह की ट्रोलिंग से क्या वो दुखी हैं?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "हां मुझे बुरा ज़रूर लगा है. मेरी पत्नी भी इससे परेशान है. उसे इस तरह की ख़बरों की आदत नहीं है. लेकिन मुझे उन लोगों भी पर तरस आ रहा है जो धर्म और राजनीति को इस कदर जोड़ रहे हैं. मुझे अच्छे से मालूम है कि इनमें से कई पेशेवर ट्रोल्स हैं और उन्हें ये सब करने के पैसे मिलते हैं. कइयों को राजनीतिक पार्टियों ने हायर कर रखा है."
'राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं'
बहुत से लोग ऐसी अटकलें भी लगा रहे हैं कि मनोज तिवारी राजनीति के क्षेत्र में क़दम रखने वाले हैं?
इस बारे में उन्होंने कहा, "मेरा ऐसा दूर-दूर तक कोई इरादा नहीं है. मैं राजनीतिक रूप से ज़ागरूक हूं और सामाजिक-राजनीतिक मामलों पर खुलकर अपनी राय भी रखता हूं लेकिन राजनीति में शामिल होने की मेरी कोई योजना नहीं है. मैं तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यक्रमों में शरीक़ हुआ हूं, शायद इसलिए भी लोग ऐसी अटकलें लगा रहे हैं लेकिन मैं वहां इसलिए गया क्योंकि मुझे बुलाया गया था. मैं इन कार्यक्रमों में किसी राजनीतिक मक़सद से शामिल नहीं हुआ था."
मनोज तिवारी कहते हैं कि वो देश के मौजूदा माहौल से ख़ासे निराश हैं.
उन्होंने कहा, "आज जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति चमकाई जा रही है, वो परेशान करने वाला है. मैं हर त्योहार पर शुभकामनाएं देता हूं, तस्वीरें पोस्ट करता हूं लेकिन रमज़ान की मुबारकबाद देने पर विवाद होता है. ये सब निराश करने वाला है."
मनोज कहते हैं कि उन्होंने दूसरी पोस्ट इसीलिए कि ताकि लोग उनके असल इरादे को समझ सकें. उन्होंने कहा, "मैं मानवता में यक़ीन रखता हूं और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता. इस समय हमारे सामने ग़रीबी, भूख और बीमारी जैसी बड़े मुद्दे हैं. हम उन पर ध्यान दें तो बेहतर होगा."
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