सोशल: 'दादा ने संघ को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया'

प्रणब

इमेज स्रोत, Getty Images

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार शाम नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में स्वयंसेवकों को संबोधित करने पहुंचे थे.

प्रणब मुखर्जी के इस भाषण का लंबे वक़्त से इंतज़ार किया जा रहा था. कुछ लोग इस फ़ैसले को संवाद की शुरुआत के तौर पर देख रहे थे, तो दूसरे उनके वहां जाने की आलोचना कर रहे थे.

लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने अपने भाषण से काफ़ी लोगों का दिल जीत लिया. भाषण ख़त्म होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर वो ट्रेंड होने लगे.

मोहन भागवत

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रणब ने भाषण ने कहा कि भारत की राष्ट्रीयता एक भाषा और एक धर्म में नहीं है. हम वसुधैव कुटुंबकम में भरोसा करने वाले लोग हैं.

उन्होंने कहा कि भारत के लोग 122 से ज़्यादा भाषा, 1600 से ज़्यादा बोलियां बोलते हैं. यहां सात बड़े धर्म के अनुयायी हैं और सभी एक व्यवस्था, एक झंडा और एक भारतीय पहचान के तले रहते हैं.

राजेश कुमार पांडे ने लिखा, ''डॉ प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रवाद के बारे में बात की, बेहतरीन भाषण दिया.''

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हम सहमत हो सकते हैं, असहमत हो सकते हैं, लेकिन हम वैचारिक विविधता को दबा नहीं सकते.

प्रणब

इमेज स्रोत, Twitter

प्रणब

इमेज स्रोत, Twitter

उन्होंने कहा, ''50 सालों से ज़्यादा के सार्वजनिक जीवन बीताने के बाद मैं कह रहा हूं कि बहुलतावाद, सहिष्णुता, मिलीजुली संस्कृति, बहुभाषिकता ही हमारे देश की आत्मा है.''

जॉय दास ने लिखा है. ''प्रणब मुखर्जी के लिए सम्मान. वो पाषाण युग से गुज़रते हुए आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे और राष्ट्रवाद का असली अर्थ समझाया, वो भी उन लोगों के हवाले से जिनसे वो नफ़रत करते हैं - नेहरू और गांधी.''

जानी-मानी पत्रकार सागरिका घोष ने लिखा, ''पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विविधता से गुज़रने वाले संवैधानिक राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया और ये संदेश लेकर भगवा गढ़ में पहुंचे. और किसके हवाले से ये बातें कहीं, संघ के दुश्मन जवाहरलाल नेहरू के हवाले से.''

प्रणब

इमेज स्रोत, Twitter

प्रणब ने कहा कि नफ़रत और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीय पहचान ख़तरे में पड़ेगी. जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रवाद में हर तरह की विविधता के लिए जगह है. भारत के राष्ट्रवाद में सारे लोग समाहित हैं. इसमें जाति, मजहब, नस्ल और भाषा के आधार पर कोई भेद नहीं है.

उन्होंने कहा, ''भारत का राष्ट्रवाद यूरोपीय राष्ट्र-राज्य से अलग है. भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम में है. हमारी राष्ट्रीय पहचान हासिल करने की एक लंबी प्रक्रिया रही है. इसमें भाषिक और धार्मिक विविधता के लिए पूरी जगह है.''

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

तरुण सक्सेना ने इस भाषण पर लिखा, ''दादा ने संघ के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)