सोशल: 'मोदी जी बीएचयू आकर सेल्फी विद डॉटर लीजिए'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के वाराणसी दौरे पर हैं. लेकिन वाराणसी शुक्रवार से मोदी की वजह से नहीं, बल्कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) की वजह से चर्चा में है.
बीएचयू कैंपस में गुरुवार को एक छात्रा से कथित छेड़छाड़ के बाद छात्राएं यूनिवर्सिटी गेट पर प्रदर्शन कर रही हैं.
'रात को बाहर क्यों निकलती हो'

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आकांक्षा ने कहा, ''छेड़छाड़ की शिकायत करने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन हमसे उलटा सवाल करने लगता है. आए दिन पूछा जाता है कि रात या बेवक्त बाहर क्यों निकलती हो.'
बीएचयू में छात्राओं के प्रदर्शन की सोशल मीडिया पर भी चर्चा है. बीएचयू की पूर्व छात्राएं भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लिख रही हैं.

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पढ़िए, बीएचयू की पूर्व छात्राओं ने क्या लिखा?
प्रदीपिका सारस्वत ने साल 2012 में बीएचयू से पढ़ाई की थी. प्रदीपिका ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''2012 में मुझे भी नवीन हॉस्टल मिला था. पहली वॉर्डन मीटिंग हुई तो कहा गया कि हॉस्टल की इज़्ज़त आप सब लड़कियों की इज़्ज़त है. हॉस्टल से एक किलोमीटर की दूरी तक आप किसी लड़के के साथ नज़र नहीं आनी चाहिए.
उन्हीं दिनों परिसर में 24x7 साइबर लाइब्रेरी की शुरुआत हुई. लड़के वहां जा सकते थे लेकिन लड़कियां नहीं, क्योंकि हम सात बजे के बाद बाहर नहीं निकल सकती थीं. हमने प्रशासन से शिकायत की. सिग्नेचर कैंपेन किया पर कुछ नहीं हुआ. ख़ुशी है कि आकांक्षा और बाक़ी लड़कियां आवाज़ उठा रही हैं. बदलाव आज नहीं तो कल, आएगा ज़रूर.''
बीएचयू की पूर्व छात्रा यशी कविता दास लिखती हैं, ''दो साल पहले त्रिवेणी के सामने दिनदहाड़े एक लड़की को चार थप्पड़ मारकर निकल गए दो-तीन लड़के. हमने वीसी हाउस के बाहर प्रदर्शन किया था. पता है उस लड़की को थप्पड़ क्यों मारा गया था? क्योंकि वो लड़के दूसरे लड़के को मारने आए थे, जिससे वो लड़की बात कर रही थी. इसलिए उसे भी जड़ दिया.''
यशी अपनी एक दोस्त का किस्सा बताते हुए लिखती हैं, ''एक दोस्त नवीन हॉस्टल दौड़ते हांफते और रोती हुई पहुंची. क्योंकि तीन लड़के चिल्लाने लगे इसको पकड़ो और दुपट्टा खींचने लगे. रात भर महिला सेल का नंबर लगाया. किसी ने फोन नहीं उठाया."
आकांक्षा एन सहाय ने फेसबुक पर लिखा, ''इसमें कोई दो मत नहीं है कि गलती प्रशासन की ही है. ऊपर से मदद करने की बजाय प्रशासन गलती लड़कियों की ही बताता है. 2015 में हुए विरोध प्रदर्शन को भी दबा दिया गया. प्रशासन ने बस ये किया कि पांच दिन चुनिंदा गर्ल्स होस्टल के बाहर प्रॉक्टर की पेट्रोलिंग करवाई और उसके बाद सब हवा.''
स्वाति सिंह लिखती हैं, ''बीएचयू में छात्राओं से छेड़खानी की ये पहली घटना नहीं है. कई बार छात्र-छात्राएं खुद इन मुद्दों के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं. पर हर बार प्रशासन कभी उन्हें नंबर कम देने की धमकी देकर पीछे कर लेता तो कभी उनके घरवालों से प्रेशर दिलवाकर. लेकिन इस बार स्टूडेंट्स पूरी तरह अड़ चुके है.''
बीबीसी ने इसी मुद्दे पर कहासुनी के जरिए पाठकों से सवाल किया,

कैंपस लड़कियों के लिए कितने असुरक्षित हैं?
इस सवाल पर हमें कई लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलीं.
मनीषा शर्मा लिखती हैं, ''एंटी रोमियो दल को बीएचयू भेजो न. एंटी रोमियो दल की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में ज़रूरत है.''
फ़ेसबुक पर कनपुरिया नाम के एक अकाउंट से लिखा गया, ''प्रधानमंत्री जी 'सेल्फी विद डॉटर' के तहत एक सेल्फी आंदोलनरत लड़कियों के साथ भी ले लेते. बीएचयू में लड़कियों की सुरक्षा का ख़तरा हमेशा के लिये ख़त्म हो जाता.''
मोहम्मद जावेद लिखते हैं, ''मदरसों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने वाली राष्ट्रवादी सरकार और जेएनयू में कंडोम गिनने वाले स्वघोषित राष्ट्रवादियों को बीएचयू में सरेआम होती भगवा गुंडई नज़र नहीं आ रही.''

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मनमोहन पांडे ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''ओह. योगी के राज, मोदी के क्योटो और बीएचयू जैसे शिक्षामंदिर में ये घटना. वो भी तब मोदीजी बनारस दौरे पर हैं. अच्छे दिन.''
विष्णु ने फेसबुक पर लिखा, ''बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्राओं के साथ होने वाली रूटीन छेड़खानी की मुख़ालफ़त में सरेआम दुपट्टा खींचने और कट्टा लहराने वाले छात्र भी शामिल हैं. है ना अजब-ग़ज़ब देश. का कीजिएगा...''
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