सोशल- 'अखिलेश बबुआ ने की अरदास, बुआ आ जाओ मेरे साथ...'
उत्तर प्रदेश की राजनीति गुरुवार शाम से दो वजह से चर्चा में है. पहला एग्जिट पोल और दूसरा अखिलेश यादव को बीबीसी हिंदी को दिया एक्सक्लूसिव फेसबुक लाइव इंटरव्यू
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मायावती से हाथ मिलने के सवाल पर कहा, ''हां अगर सरकार के लिए ज़रूरत पड़ेगी तो राष्ट्रपति शासन कोई नहीं चाहेगा. हम नहीं चाहते कि यूपी को बीजेपी रिमोट कंट्रोल से चलाए."
अखिलेश यादव के इस बयान को मायावती से हाथ मिलाने की संभावना को खुला रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
बीबीसी हिंदी को दिए अखिलेश यादव के इस इंटरव्यू की चर्चा सोशल मीडिया पर भी रही.
पढ़िए अखिलेश के बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय

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हेरांब वर्मा ने ट्वीट किया, ''अखिलेश यादव 300 सीट जीतने जा रहे थे. फिर भी बसपा के समर्थन की ज़रूरत पड़ रही है.''

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राहुल राज ट्विटर पर लिखते हैं, ''चुनाव से पहले अखिलेश यादव हाथ के साथ थे. चुनाव के बाद अखिलेश यादव हाथी के साथ हैं.''

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प्रवीण पाल ने ट्वीट किया, ''अखिलेश यादव को बुआ जी याद आ रही हैं.'' @adityakrdam ने लिखा, ''राहुल अखिलेश से: हम तो डूबे ही थे, तुमको भी ले डूबे.''

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सतीश सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ''अखिलेश यादव जी, आपको बुआ का सहारा नहीं लेना होगा. यूपी में न बुआ चली. न बबुआ चली. सिर्फ कमल का फुलवा चली. वो भी पूर्ण बहुमत से.''

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संतोष यादव ने फेसबुक पर लिखा, ''अखिलेश का बड़ा बयान, राष्ट्रपति शासन से बेहतर है 'बुआ' से गठबंधन!!''

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प्रिया पंत ने फेसबुक पर लिखा, ''एक चैनल बार-बार अखिलेश और मायावती के साथ आने की संभावना से दुखी लग रहा है. अरे बीजेपी और पीडीपी का मेल क्या था चिंटू''

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प्रिंस प्रताप सिंह ने लिखा, ''अखिलेश: अगर चुनाव हार गए तो क्या होगा. राहुल: हमको तो आदत है, तू अपना देख.''
@akhileshamoli ने ट्वीट किया, ''अखिलेश को आज बुआ याद आई हैं, 11 को नानी याद आएंगी.''
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