'पैदाइशी कांग्रेसी' सिद्धू के राहुल पर बोल वचन

नवजोत सिंह सिद्धू

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कई साल भाजपा में गुज़ारने के बाद ऐन पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस का दामन थामने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने रविवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात की और कांग्रेस में शामिल हो गए.

सिद्धू ने सोमवार को बतौर कांग्रेसी नेता अपने पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया तो अपने ख़ास रंग में दिखे. लच्छेदार भाषा और मुहावरों से सजे तंज़ भी छोड़े.

उन्होंने कहा कि वे 'पैदाइशी कांग्रेसी' हैं और ये घटनाक्रम उनकी घर-वापसी जैसा है. अपने भाषण देने के अंदाज़ के लिए मशहूर सिद्धू जब अकाली दल के नेताओं पर हमले बोल रहे थे तो उनके कुछ पुराने भाषणों ने उन्हीं की किरकिरी का रास्ता तैयार किया.

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पत्रकारों ने उनसे पूछा कि वो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के बारे में पहले इतना कुछ कह चुके हैं और अब उन्हीं के साथ हो रहे हैं, तो पहले वो कुछ झिझके, फिर कहा, '''राहुल गांधी का मैंने कोई नाम नहीं लिया था. पहले वालों (मनमोहन सिंह) का लिया था.''

लेकिन नेताओं के मामले में निर्दयता से पेश आने वाले सोशल मीडिया ने उनके दावे की हवा निकाल दी.

रोज़ी नामक हैंडल से सिद्धू का एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें वो ये कहते हुए दिखाई-सुनाई दे रहे हैं, ''हे राहुल बाबा, स्कूल जाओ स्कूल. और स्कूल में जाकर पढ़ना सीखो. राष्ट्रवाद और राष्ट्रद्रोह में फ़र्क सीखो.''

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जब पत्रकारों ने कुरेदा तो सिद्धू ने कहा, ''राजनीतिक भाषणों में ऐसा होता है. मुझे भी काफ़ी कुछ कहा गया है. आप सागर की बात करो, कब तक कुएं के मेंढक बने रहोगे.''

एक दूसरे वीडियो में वो कह रहे हैं, ''अरे कांग्रेस मुन्नी से ज़्यादा बदनाम हो गई.''

मनमोहन सिंह पर हमले की बात उन्होंने मानी जिसके पर्याप्त सबूत भी मौजूद हैं.

चुनावी प्रचार की एक रैली में वो पंजाबी में कह रहे हैं, ''कांग्रेस के पास ना तो नेतृत्व है. पप्पू प्रधानमंत्री है कांग्रेस का. कोई मजबूर प्रधानमंत्री ईमानदार नहीं हो सकता. मुझे तो शक है कि सरदार भी है कि नहीं. सरदार होगा, तो असरदार नहीं होगा! लोग कहते हैं कि अर्थशास्त्री हैं, मैं कहता हूं कि व्यर्थशास्त्री हैं.''

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एक अन्य वीडियो में सिद्धू ने कहा, ''एक तरफ़ जानदार मोदी साहब और दूसरी तरफ़ ऐसा प्रधानमंत्री, जो ना सरदार, ना असरदार है.''

लेकिन जैसा कि सिद्धू ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए. और इस वक़्त कांग्रेस से उनके मतभेद पूरी तरह ख़त्म हो चुके से लगते हैं.

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