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धनुरासन से कमर दर्द से राहत

सरल धनुरासन
सरल धनुरासन से कमर, सरवाइकिल स्पोण्डिलाइटिस से संबंधित दर्द दूर होते हैं

सरल धनुरासन, धनुरासन बहुत लाभकारी हैं. सरल धनुरासन से सरवाइकल स्पाँडलाइसिस में आराम मिलता है, वहीं धनुरासन सांस संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है.

धनुर का अर्थ है धनुष. धनुरासन में हम हाथों से पैरों के टखने पकड़ कर धनुष की तरह खींचते हैं, जैसे धनुष पर तीर खींचा जाता है.

इस आसन में रीढ़ में खिंचाव आता है और इसके चलते रीढ़ का कड़ापन कभी नहीं होता.

बचपन से इन आसन का अभ्यास करें तो शरीर का पूर्ण विकास भी होता है और कमर, सरवाइकल स्पाँडलाइसिस के दर्द की संभावना नहीं रहती है.

रीढ़ हमारे शरीर का स्तंभ है इसलिए इसके स्वास्थ्य का हमेशा ख़्याल रखना चाहिए.

कैसे करें धनुरासन

कंबल पर पेट के बल लेट जाइए. ठुड्डी ज़मीन पर रखें. पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों से पैरों के टखने पकड़ें. यह धनुरासन की ये प्रारंभिक स्थिति है.

 स्लिप डिस्क के कारण कमर दर्द हो या सरवाइकल स्पाँडलाइसिस हो उन्हें सरल धनुरासन का अभ्यास नियमित करना चाहिए

सांस भर लीजिए और बाजू सीधे रखते हुए सिर, कंधे, छाती को ज़मीन से ऊपर उठाइए. पैर नहीं उठाएंगे बल्कि पैरों के सहारे बाजू पीछे की ओर धकेलेंगे.

इस स्थिति में साँस सामान्य रखिए और चार-पाँच सेकेंड के बाद साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहले छाती, कंधे और ठुड्डी को ज़मीन की ओर लाइए, टखने छोड़ दीजिए और कुछ देर विश्राम कीजिए. इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएँ.

विशेष

सरल धनुरासन करते समय पेट और छाती की पेशियों में खिंचाव और बाजू, कंधे की ओर भी ध्यान रखना चाहिए.

जिन लोगों की कमर मे अकड़न है. ख़ासकर स्लिप डिस्क है या सरवाइकल स्पाँडलाइसिस है, उन्हें सरल धनुरासन से निश्चित तौर पर लाभ होगा.

जिन्हें स्लिप डिस्क के कारण कमर दर्द हो या सरवाइकल स्पाँडलाइसिस हो उन्हें सरल धनुरासन का अभ्यास नियमित और लंबे समय तक करना चाहिए.

यह आसन रक्त संचार बढ़ाता है, हृदय, फेफड़े और श्वास-प्रश्वास की क्रिया में सुधार लाता है.

धनुरासन

सरल धनुरासन और धनुरासन में अंतर केवल इतना है कि आप सरल धनुरासन की प्रारंभिक स्थिति में आ जाएँ और साँस भरे. इसी अवस्था में आप हाथों को और पैरों को भी ऊपर की ओर खींचें.

इस अवस्था में आपकी छाती, कंधे उठे रहेंगे. सिर को भी पीछे की ओर मोड़िए.

पैरों के तलवे को भी पीछे खींचिए ताकि बाजू में खिंचाव आए और धनुष का आकार बन जाए.

 धनुरासन को भुजंगासन और अर्ध शलभासन के बाद करना चाहिए और कम से कम तीन से चार घंटे बाद ही इसका अभ्यास करें

दो-तीन पल रुकिए फिर सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएँ. टखनों को छोड़ दीजिए और तब तक विश्राम कीजिए जब तक सांस सामान्य न हो जाए. इसे आप तीन-चार चक्र कर सकते हैं.

धनुरासन को भुजंगासन और अर्ध शलभासन के बाद करना चाहिए और कम से कम तीन से चार घंटे बाद ही इसका अभ्यास करें.

जो हृदय रोगी हैं, जिन्हें उच्च रक्त चाप है, हार्निया, कोलाइटिस, पेप्टिक या डूयोडिनल अल्सर है, उन्हें धनुरासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.

विशेष

धनुरासन को रात में या सोने से पहले अभ्यास नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे एड्रिनल ग्रंथी उत्तेजित हो जाती है जिसके कारण नींद में बाधा आती है. इसे सुबह के समय ही करें.

फेफड़ों और सांस से संबंधित समस्याएं जैसे- दमा में इस आसन से फ़ायदा होता है. इस आसन में छाती का फैलाव होता है.

इस आसन से रीढ़ की लचक बढ़ती हैं, महिलाएं भी धनुरासन का अभ्यास कर सकती हैं.

धनुरासन से उदर यानी पेट के सभी अंगों में खिंचाव आता है. इससे कब्ज की समस्या दूर होती है और पाचन क्रिया में सुधार होता है. लीवर की कार्यक्षमता नियमित होती है और अग्नाशय और एड्रिनल ग्रंथी भी उचित स्राव करने लगती है.

(योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)

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