|
एचआईवी दवाओं ने बढ़ाई ज़िंदगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अध्ययन के मुताबिक एचआईवी से लड़ने में सक्षम दवाओं के बूते पिछले दस वर्षों में इससे संक्रमित मरीज़ों की आयु में तेरह वर्षों की औसत वृद्धि दर्ज की गई है. लान्सेंट में प्रकाशित शोध के अनुसार अब एचआईवी को जानलेवा बीमारी की बजाए इससे संक्रमित व्यक्ति को मधुमेह रोगी की तरह गंभीर स्थिति में रखा जा सकता है. शोधकर्ताओं की टीम में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ता शामिल थे. यह रिपोर्ट 43 हज़ार मरीज़ों के निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक बीस वर्ष की उम्र में एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का इलाज शुरु किया जाए तो वह 49 वर्ष और जीवित रह सकता है. लेकिन यूरोप और उत्तरी अमरीका के शोधकर्ताओं ने चेताया है कि यह 80 वर्ष की औसत आयु से कम है. अभी एचआईवी संक्रमित लोगों का इलाज एंटीरेट्रोवायरल पद्धति से होता है. इसमें जो दवाइयाँ दी जाती है वो शरीर में एचाईवी विषाणु को फैलने से रोकती है. नब्बे के दशक की शुरुआत में इस पद्धति का इस्तेमाल शुरु हुआ लेकिन अब यह ज़्यादा असरदार साबित हो रहा है. शोधकर्ताओं ने 1996 से 1999, 2000 से 2002 और 2003 से 2005 की अवधि में उच्च आय वाले देशों में ताज़ा अध्ययन किया है. अध्ययन के दौरान सिर्फ़ दो हज़ार मरीज़ों की मौत हुई. |
इससे जुड़ी ख़बरें दवाएँ घटाती हैं शिशु में एचआईवी संक्रमण का ख़तरा07 मई, 2008 | विज्ञान मर्क ने एचआईवी टीके के 'ट्रायल' बंद किए22 सितंबर, 2007 | विज्ञान सेलेनियम से एचआईवी का मुक़ाबला07 मई, 2007 | विज्ञान चीन में एचआईवी मामले तीस फ़ीसदी बढ़े22 नवंबर, 2006 | विज्ञान एचआईवी के टीके के लिए 30 करोड़ डॉलर19 जुलाई, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||