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शनिवार, 12 अप्रैल, 2008 को 06:47 GMT तक के समाचार
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ख़ुदकुशी को बढ़ावा दे रही साइटों से चिंता
विषाद में डूबा आदमी
सर्च इंजन पर वो साइटें प्रमुखता से दिखती हैं जो ख़ुदकुशी को बढ़ावा देती हैं
एक अध्ययन से यह पता चला है कि ख़ुदकुशी के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी तलाश करने वालों को ऐसी वेबसाइटें ज़्यादा मिलती हैं जो समझाने की बजाय इसे बढ़ावा दे रही हैं.

इस शोध के नतीजे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे हैं.

शोधकर्ताओं ने चार सर्च इंजन पर ख़ुदकुशी से जुड़ी जानकारी मुहैया कराने वाली वेबसाइटों का अध्ययन किया है.

सर्ज इंजन पर सर्वाधिक प्रमुखता से दिखने वाली तीन साइटें आत्महत्या को बढ़ावा देने वाली निकलीं.

इसे देखते हुए शोधकर्ताओं ने सर्च इंजन संचालकों से अपील की है कि ऐसी वेबसाइटों को प्राथमिकता के साथ दिखाएँ जो लोगों को ख़ुदकुशी न करने की सलाह देती है और लोगों को समझाती हैं.

मानसिक शांति के पैरोकारों का कहना है कि ये वेबसाइटें उन लोगों को अपना शिकार बना रही हैं जो इस लिहाज़ से सबसे ज़्यादा संवेदनशील हैं.

कुछ देशों में आत्महत्या को बढ़ावा देने वाली साइटों पर प्रतिबंध है लेकिन ब्रिटेन में इन पर कोई रोक नहीं है.

ब्रिटेन का आत्महत्या क़ानून 1961 कहता है कि किसी को ख़ुदकुशी में मदद करना, ऐसी सलाह देना, बाध्य करना या किसी को उकसाना ग़ैर-क़ानूनी है.

लेकिन ऐसे किसी आदमी को सज़ा दिलाने के लिए ज़रूरी है कि उसे इसकी जानकारी रही हो और वह किसी की आत्महत्या में शामिल रहा हो.

भारत में ऐसे ही क़ानून हैं.

लगाम के उपाय

ब्रिस्टल, ऑक्सफ़ोर्ड और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सर्च इंजनों पर आत्महत्या से जुड़े 12 सामान्य शब्दों की मदद से पड़ताल की.

उन्होंने चारों सर्च इंजन पर ऊपर से दस साइटों का विश्लेषण किया जिनकी कुल संख्या 480 रही. कुल मिलाकर 240 तरह की साइटें मिलीं जिनमें से हरेक पाँचवाँ आत्महत्या को समर्पित था.

इंटरनेट कैफ़े
शोधकर्ताओं का कहना है कि आत्महत्या विरोधी साइटों को प्राथमिकता से दिखाना चाहिए

हर दस में एक साइट ऐसी थी जो आत्महत्या पर आंकड़े या हास्यास्पद जानकारी मुहैया कराती है.

इनमें आत्महत्या रोकने पर केंद्रित 13 फ़ीसदी वेबसाइटें मिलीं जबकि 12 फ़ीसदी साइटें ही आत्महत्या को सक्रियता के साथ हतोत्साहित करती हैं.

प्रमुख शोधकर्ता लुसी बिड्डल कहती हैं कि क़ानून के कारण यह मामला इंटरनेट कंपनियों के आत्म-नियंत्रण पर निर्भर है या फिर अभिभावकों द्वारा इस तरह की साइटों को छानने वाली सॉफ़्टवेयरों के उपयोग पर.

लेकिन वे कहती हैं,"यह शोध दिखाता है कि बड़ी आसानी से आप आत्महत्या के तरीक़े जान सकते हैं."

लुसी कहती हैं कि इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियाँ ऐसी रणनीति बना सकती हैं जो आत्महत्या को रोकने वाली साइटों को प्रमुखता से दिखने की संभावनाएँ बढ़ाए.

लेकिन ब्रिटेन के इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के संघ का कहना है कि उनका सामग्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं है, वे बस ग़ैर-क़ानूनी साइटों को दिखने से रोक सकते हैं.

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बढ़ती आत्महत्याएं?
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