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इंटरनेट के ज़रिए शादियों का बढ़ता चलन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूचना तकनीक के इस युग में अब शादियाँ भी पंडितों के बजाए वेबसाइट के जरिए हो रही हैं. ज़्यादा से ज़्यादा लोग अब इसके माध्यम से अपने जीवन साथी का चुनाव कर रहे है और रिश्ते तय करने वाली वेबसाइटों की भरमार हो गई है. भोपाल के संजय दांगी और राजस्थान की प्रगति का परिवार एक दूसरे से भले ही सैंकडों मील दूर रहा हो मगर शादी करानेवाली वेबसाइट ने उन्हें इतना क़रीब ला दिया की चंद महीनों के अंदर ही वे एक दूसरे के हो गए. इस दौरान इस वेबसाइट ने दांगी परिवार को ऐसी दर्जनों लड़कियाँ बताईं जो उनके पुत्र के योग्य थी. संजय दांगी मानते है,'' ये शादी कम वक्त और कम पैसों में हो गई. मेरे परिवार को लड़की तलाश करने के लिए ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ी. हमने एक दूसरे को समझने का काम भी इंटरनेट के ज़रिए किया.'' वही प्रगति भी मानती है कि उनका फ़ैसला बिल्कुल सही था. इन दोनों ने शादी से पहले कुंड़ली मिलाने के बजाए अपनी हेल्थ कुंडली मिलाई ताकि उन्हें एक दूसरे की सेहत का अंदाज़ा हो सके. समय की बचत भोपाल में शादी पाइंट डॉट कॉम का काम देखने वाले रामजी श्रीवास्तव का कहना है कि इसके ज़रिये कम समय में ज़्यादा आसानी से रिश्ता तलाशा जा सकता है.
रामजी कहते है, '' एक बार रजिस्ट्रेशन कराने के बाद लोगों को लड़के या लड़कियों के इतने विकल्प दे दिए जाते है कि उन्हें चुनाव करना आसान हो जाता है.'' उनका कहना था कि लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है. उनके अनुसार थोड़े से पैसों में हर कोई ये सुविधा लेना चाहेगा. जीवनसाथी डॉट काम की निधि शर्मा का कहना है कि अब तक इस तरह की शादियाँ मेट्रो में ही हुआ करती थी, मगर अब छोटे शहरों में भी इसका चलन बढ़ रहा है. उनका कहना है कि इसमें लोगों को बड़ी तादाद में से चुनने का विकळ्प मिलता है. गलत जानकारी मगर इन वेबसाइटों में ऐसे लोगों की तादाद भी बड़ी संख्या में है जो गलत जानकारियाँ देते हैं. जीवनसाथी डॉट कॉम की निधि शर्मा कहती है, '' इसमें से रजिस्टेशन कराने वाले लगभग बीस प्रतिशत लोग गलत जानकारी देते है. सही जानकारी लेना ग्राहक का काम है.'' रामजी श्रीवास्तव का भी कहना है कि उनका काम दोनों परिवारों को मिलवाने तक ही सीमित है. पूरी जानकारी तो उन्हें ही पता लगानी पड़ेगी. कामयाबी इस सब के बीच एक बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर कितनी कामयाब होती है इस तरह की शादी. सभी का ये कहना है कि दूसरी शादियों की तरह इसमें भी हर शादी कामयाब नही होती है. इसी तरह से मुलाकात अदित्य और सपना की हुई. तीन माह के अंदर ही दोनों एक दूसरे के हो गए. शुरु-शुरु में तो सब ठीक रहा मगर चंद महीनों में ही दोनों एक दूसरे से अलग हो गए. शायद दोनों ने एक दूसरे को वैसा नही पाया जैसा ईमेल के आदान प्रदान के दौरान उन्होंने सोचा था. बावजूद ऐसी घटनाओं के इन वेबसाइटों के ज़रिये अपना हमसफ़र चुनने वालों की तादाद में लगातार इज़ाफा हो रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें कुंडली नहीं मेडिकल रिपोर्ट देखेंगे पुरोहित05 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस पानी से बंधी है शादी की उम्मीद26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी शादी में कर्मचारी दीवाने....05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एवरेस्ट की ऊँचाई पर शादी रचाई03 जून, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में माइक्रोसॉफ़्ट के इंटरनेट बूथ 03 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान भारतीय रेल में ई-टिकट की शुरूआत24 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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