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सरकारी शादी में कर्मचारी दीवाने.... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विवाह एजेंसियों से जुड़े लोगों को शादी के लिए वर-वधु तलाशने का काम करते हुए आपने देखा होगा लेकिन छत्तीसगढ़ में हज़ारों सरकारी कर्मचारी पिछले कुछ महीने से यही काम कर रहे हैं. असल में मामला “सरकारी शादी” का है. और हो ये रहा है कि सरकारी शादियों के आँकड़े पूरे करने के लिए सरकारी कर्मचारी शादीशुदा और बाल बच्चेदार लोगों की भी दोबारा शादी करवाने में लग गए हैं. दिलचस्प ये है कि इन शादियों में सरकार की ओर से अक्सर मुख्यमंत्री या कोई दूसरा मंत्री उपस्थित होता है. शादी की ये सरकारी योजना महिला एवं बाल विकास विभाग चला रहा है. इस विभाग के सचिव एस के कुजूर का कहना है कि जो कर्मचारी काम नहीं करते, वही अपनी व्यस्तता की बात कह रहे हैं. उन्होंने कहा, "अगर उन्हें कुछ जोड़ियाँ एक साल में ढूढ़कर लाना है तो ये कोई बड़ा काम नहीं है." योजना छत्तीसगढ़ की सरकार ने पिछले साल से राज्य में 'निर्धन कन्या विवाह योजना' चला रखी है. इस योजना के तहत शादी के खर्च उठा पाने में अक्षम लोगों की सरकारी खर्च पर शादी की जाती है. नवदंपत्ति को सरकार एक हज़ार रुपए नग़द और चार हज़ार रुपए के घरेलू उपयोग के समान भी उपहार स्वरुप देती है. आम तौर पर ऐसी शादियां सामूहिक रुप से हो रही हैं, जिसमें कहीं-कहीं पांच-पांच सौ जोड़ों ने एक साथ फेरे लिए हैं. राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह वादा कर रहे हैं कि इस वर्ष कम से कम दस हज़ार ऐसी शादियां करवाई जाएँगी. विवाद इन शादियों के लिए वर-वधु तलाशने से लेकर विवाह कराने तक की ज़िम्मेदारी राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग पर है.
ज़ाहिर है, विभाग से जुड़े अधिकांश लोग शादी-ब्याह के इस मौसम में ऐसे ही आयोजनों में व्यस्त हैं. तेज़ गरमी और चिलचिलाती धूप में सरकारी कर्मचारी गांव-शहर की गलियों की खाक छानते हुए घर-घर जा कर वर-वधु ढूंढ़ रहे हैं. कुछ इलाकों में सरकार ने अपने मातहतों को ये चेतावनी भी दी है कि शादी के लिए कम से कम पाँच जोड़े नहीं तलाश पाने की स्थिति में उनकी एक महीने की तनख्वाह नहीं दी जाएगी. ऐसे में कई जगह अपनी ड्यूटी पूरी करने के चक्कर में नाती-पोते वालों की भी शादियाँ करवायी जा रही हैं तो कुछ लोग पैसों के लालच में भी शादी कर रहे हैं. लोग अपने बच्चों के साथ भी सात फेरे ले रहे हैं. कई जगहों से बाल विवाह की ख़बरें आ रही हैं. बेमेल जोड़ियाँ तो आम हैं. बच्चों के साथ फेरे रायपुर के हथबंद में इसी तरह की एक सरकारी शादी में जब केसली गांव के तिलक और उनकी पत्नी ईश्वरी ने सात फेरे लिए तो गांव के कुछ लोगों ने इस शादी का विरोध किया क्योंकि दोनों न केवल पहले से शादी शुदा थे, बल्कि उनका एक चार साल का बच्चा भी है. सरकारी अधिकारियों ने विरोध करने वालों को चुप करा दिया फिर दोनों ने फेरे लिए.
वहां उपस्थित राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लता उसेंडी ने इस जोड़ी को आशीर्वाद भी दिया. तिलक कहते हैं, “हमें बताया गया था कि सरकारी शादी में शामिल होना ज़रुरी है. ऐसा नहीं करने पर हम पर जुर्माना लगाया जा सकता है.” इसी सरकारी समारोह में कुंती ध्रुव और प्रेमलाल सतनामी ने भी अग्नि को साक्षी मान कर जब एक दूसरे का हाथ थामा तो कुंती का दूसरा हाथ उसके बच्चे ने थाम रखा था. कुंती और प्रेमलाल पहले से ही शादी-शुदा हैं और एक बच्चे के बाद कुंती फिर से माँ बनने वाली हैं. मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह ज़िले कवर्धा में कादावानी के उपसरपंच ने जब सात फेरे लिए तो लोग भौंचक हो गए क्योंकि यह उपसरपंच बाल-बच्चेदार तो था ही, उसके दो नाती भी हैं. इस सरकारी शादी में कई बाल-बच्चेदार और नाती-पोते वालों ने दुबारा फेरे लिए और सरकारी नियम-क़ायदे को धत्ता बता दिया. हालांकि इस क्षेत्र के लोगों ने इस तरह की शादियों के ख़िलाफ़ दोतरफ़ा मोर्चा खोल दिया है. एक तरफ़ नागरिकों ने एक समिति बना कर सरकार से पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की है. वहीं दूसरी तरफ़ दोबारा फेरे लेने वालों पर आर्थिक दंड देने की भी योजना बनाई जा रही है. ऐसी अधिकांश शादियों में उपस्थित राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लता उसेंडी कहती हैं, “हमारी जानकारी में निर्धन कन्या योजना के तहत हो रही शादियों में गड़बड़ी के कुछ मामले आए हैं और हम उनकी जांच करवा रहे हैं.” लेकिन उच्च न्यायालय में बच्चों और महिलाओं से संबद्ध मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता जेके शास्त्री कहते हैं, “यह सीधे-सीधे आम जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है." वे कहते हैं, "इस तरह की धोखाघड़ी के मामले के लिए सरकारी अधिकारी भी ज़िम्मेवार हैं और उन पर भी मुक़दमा दर्ज किया जाना चाहिए.” | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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