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बुधवार, 05 अक्तूबर, 2005 को 16:25 GMT तक के समाचार
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कुंडली नहीं मेडिकल रिपोर्ट देखेंगे पुरोहित

पुरोहित सभा के अधिकारी
पुरोहित सभा का कहना है कि इसे राष्ट्रीय क़ानून का रूप दिया जाना चाहिए
शादी से पहले कुंडली मिलाने की बात तो आम है लेकिन पश्चिम बंगाल के उत्तर 24परगगना ज़िले के पुरोहित अब मेडिकल रिपोर्ट मिलाने की बात कर रहे हैं.

बंगीय पुरोहित सभा ने फ़ैसला किया है कि जो युवक या युवती शादी के पहले थैलेसीमिया और एचआईवी का पता लगाने के लिए अपने खून की जाँच नहीं कराएँगे, पुरोहित उनकी शादी में मंत्र नहीं पढ़ेंगे.

सभा ने कहा है कि पूरे देश में इस फैसले को लागू किया जाना चाहिए ताकि इन घातक बीमारियों को आनुवंशिक तौर पर फैलने से रोका जा सके.

बंगीय पुरोहित सभा के सचिव सोमनाथ चट्टोपाध्याय कहते हैं कि "शादी के पहले वर-वधू का रक्त परीक्षण अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए. अब तक ऐसा कोई नियम नहीं होने के कारण यह बीमारियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी फैल रही हैं."

 अग्नि को साक्षी बनाकर सात फेरों और सिंदूरदान के पहले खून की जांच का प्रमाणपत्र पेश करना जरूरी है. यह प्रमाणपत्र देखने के बाद ही हम शादी के मंत्र पढ़ेंगे
पुरोहित सभा के सचिव

संस्था की ओर से लोगों को इस बारे में बताने के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं और गाड़ी पर बैनर लगाकर प्रचार भी किया जा रहा है.

सभा के संयुक्त सचिव शंकर प्रसाद भट्टाचार्य कहते हैं कि "जो लोग पैसों की कमी के चलते इन दोनों बीमारियों के लिए खून की जांच नहीं करा सकते, हम उनके लिए मुफ्त जाँच की व्यवस्था करेंगे. लेकिन इस नियम को कानून का स्वरूप देकर पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए."

वे कहते हैं कि "अग्नि को साक्षी बनाकर सात फेरों और सिंदूरदान के पहले खून की जांच का प्रमाणपत्र पेश करना जरूरी है. यह प्रमाणपत्र देखने के बाद ही हम शादी के मंत्र पढ़ेंगे."

सराहना

पश्चिम बंगाल में एड्स और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर शुरू हुए प्रचार को ध्यान में रखते हुए पुरोहितों का यह फैसला कुछ अनोखा, लेकिन महत्वपूर्ण है.

नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नैको) के स्थानीय निदेशक और राज्य के विशेष स्वास्थ्य सचिव सुरेश कुमार पुरोहितों के इस फैसले को सराहनीय मानते हैं.

वे कहते हैं कि "ज्यादातर लोग एचआईवी के लिए खून की जांच कराने में झिझकते हैं. अब पुरोहितों के इस फैसले से अविवाहित युवक-युवतियों को यह जांच करानी होगी. इससे आगे चलकर कई जिंदगियां बर्बाद होने से बचाई जा सकती हैं."

अब देखना है कि पुरोहितों का यह निर्णय दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनता है या नहीं, या इस निर्णय पर किस हद तक अमल हो पाता है.

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