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सोमवार, 07 अप्रैल, 2008 को 11:40 GMT तक के समाचार
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सौरमंडल का एक और 'हमशक्ल' मिला
सौर मंडल
नया मंडल हमारे सौर मंडल से ज़्यादा गठा हुआ है और क़रीब पाँच हज़ार प्रकाश वर्ष दूर है

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक तारे के चक्कर काटने वाले ग्रहों के एक ऐसे समूह की खोज की है जो बहुत कुछ हमारे सौरमंडल जैसा ही दिखाई देता है.

वैज्ञानिकों को दो ग्रह मिले जो हमारे बृहस्पति और शनि जैसे दिखाई देते हैं और जो हमारे सूर्य के आकार से क़रीब आधे आकार वाले एक तारे के चक्कर काट रहे हैं.

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज़ यूनिवर्सिटी के मार्टिन डोमिनिक कहते हैं कि यह खोज संकेत देती है कि हमारा सौरमंडल कोई अनूठा नहीं है, ऐसे कई ग्रहमंडल मौजूद हैं.

यही वजह है कि खगोल विज्ञानी सौरमंडल से मिलती-जुलते ग्रहों के ढेर सारे समूहों की खोज कर सकते हैं.

सेंट एंड्रयूज़ यूनिवर्सिटी के एक शोधार्थी ने कहा कि पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज अब सिर्फ़ समय की बात है कि इसमें कितना वक़्त लगता है.

अंतिम लक्ष्य

उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि यह भी हमारे सौर मंडल की तरह ही बना है. और यदि ऐसा हुआ तो लगता है कि हमारा सौर मंडल अंतरिक्ष में अनोखा नहीं होगा. वहाँ ऐसे अनेक ग्रहमंडल हो सकते हैं जिनमें हमारी पृथ्वी जैसा कोई ग्रह हो."

 यह एक तरह से हमारे सौरमंडल का छोटा रूप है. वह तारा जिसकी परिक्रमा ये ग्रह कर रहे हैं हमारे सूर्य से आधे वजन का है और वे ग्रह इस तारे से बृहस्पति और शनि के मुक़ाबले आधी दूरी पर परिक्रमा कर रहे हैं
डॉ मार्टिन डोमिनिक

उनके अनुसार, "यह ग्रह मंडल हमारे सौर मंडल से छोटा है और क़रीब पाँच हज़ार प्रकाश वर्ष दूर है."

हालाँकि अब तक क़रीब 300 ऐसे ग्रहों की पहचान की गई है जो हमारे सौरमंडल के नहीं है. लेकिन खगोलशास्त्री अब तक हमारे सौर मंडल जैसा दिखने वाले किसी ग्रहमंडल को ढूंढने में नाकाम रहे हैं.

उन्होंने कहा कि बाहरी ग्रहों को खोजने वाले शोधार्थियों का अंतिम लक्ष्य ऐसे ग्रहों की खोज करना था जहाँ जीवन संभव हो. और यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि तकनीक हमेशा उन्नत होती जा रही है.

उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि यह काफ़ी जल्दी हो गया और हमारे खगोलशास्त्रियों ने माइक्रो लेंसिंग तकनीक से पृथ्वी से भी ज़्यादा भार वाले ऐसे अनेक ग्रह खोज निकाले हैं जहाँ ज़िंदगी संभव है."

उन्होंने कहा कि इन ग्रहों में पृथ्वी की तरह ज़िंदगी की तलाश करने की संभावना अभी बहुत कम है क्योंकि यह ग्रहमंडल बहुत दूर है.

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