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हरित क्रांति से सूचना क्रांति की ओर.. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति को जन्मदाता माने जाने वाले चर्चित वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन अब कुछ ऐसा ही करिश्मा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करना चाहते हैं. एमएस स्वामीनाथन उन गिने-चुने लोगो में हैं जिनके प्रयासो की बदौलत साठ के दशक में कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया. हरित क्रांति के बाद भारत भोजन के मामले में आत्मनिर्भर हो गया था. स्वामीनाथन अब अपना ध्यान सूचना क्रांति को दूर-दराज़ के गांवों तक पहुँचाने में केंद्रित कर रहे हैं. गांवों को मोबाइल फ़ोन और अन्य सूचना माध्यमों से जोड़ने के लिए वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद ले रहे हैं. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के डिजिटल प्लेनेट कार्यक्रम में स्वामीनाथन ने बीबीसी को बताया कि अब वो उन प्रयासों का हिस्सा हैं जिसके अंतर्गत अधिक से अधिक लोगों को इंटरनेट की जानकारी देनी है जिससे वो “ज्ञान क्रांति” का लाभ उठा सकें. स्वामीनाथन का कहना है, "हरित क्रांति से गेंहू और चावल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिली थी लेकिन - ज्ञान क्रांति - का असर हर क्षेत्र में देखने को मिलेगा." सूचना क्रांति से लाभ स्वामीनाथन मानते है कि सूचना तकनीक के क्षेत्र में की जाने वाली क़ोशिशें भारत में “सदाबहार क्रांति” लाएँगी और इससे पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना ही उत्पादकता बढ़ती है. हाल ही में पहला महिला किसान सम्मेलन आयोजित किया गया और इसकी ख़ास बात ये थी कि ये सम्मेलन ऑनलाइन था यानि देश भर की महिला किसान नवीनतम तकनीक के ज़रिए अपने-अपने क्षेत्र से ही इस सम्मेलन में हिस्सा ले रही थी. ये उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एमएस स्वामीनाथन के प्रयासों ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है. स्वामीनाथन के अनुसार उन्हें आशंका थी कि लालफ़ीताशाही उनकी इस योजना में दख़ल डाल सकती है लेकिन ये निर्मूल साबित हुई. स्वामीनाथन कहतें है कि, "हमारे काम में नौकरशाहों का ज़्यादा रोल नहीं है और वैसे भी आईटी सैक्टर में इतनी प्रगति इसीलिए हुई क्योंकि वहां नौकरशाहों की भूमिका कम थी." पुराने दिनों को याद करते हुए स्वामीनाथन कहते हैं, "1960 के दशक में हरित क्रांति के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब हमने किसानो को बीज और तकनीक दी और फिर देखते-देखते क्रांति आ गई." स्वामीनाथन का मानना है कि आईटी क्षेत्र में सृजनात्मक काम किया जा सकता है और लोगो को समर्थ बनाया जा सकता है लेकिन वो सिर्फ़ एक रास्ता दिखा सकते है क्योंकि असली काम तो सरकार को ही करना होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें सूचना के अधिकार के लिए अभियान01 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'सरकार सूचना अधिकार को कमज़ोर कर रही है'06 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आईटी कंपनियों का चहेता है बंगलौर15 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस राष्ट्रगान पर टिप्पणी के लिए क्षमा10 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'उच्च शिक्षा 20 प्रतिशत जनता को मिले'03 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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