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सूचना के अधिकार के लिए अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सूचना के अधिकार के बारे में जागरूकता फैलाने और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने के मकसद से देशभर के 700 से ज़्यादा जनसंगठनों ने एक संयुक्त अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान के तहत दिल्ली, मुंबई, शिलांग, हैदराबाद, बंगलौर, जयपुर सहित देश के 48 प्रमुख शहरों में शिविर लगाए जा रहे हैं. इस शिविर में लोगों को सूचना के अधिकार और कानून के तहत आवेदन करके भ्रष्टाचार से लड़ने के तरीक़े समझाए जा रहे हैं. यह अभियान शनिवार को शुरू हुआ और अगले 15 दिनों तक देशभर में एकसाथ चलाया जाएगा. इस दौरान कई समाचार माध्यमों के ज़रिए लोगों को उन अनुभवों और लोगों के बारे में भी बताया जाएगा जिन्होंने इस क़ानून का प्रयोग करके भ्रष्टाचार का मुक़ाबला किया है और बग़ैर रिश्वत दिए अपने काम करवाए हैं. ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष ही केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्तर पर सूचना का अधिकार लागू कर दिया था और कुछ राज्यों में तो पहले से ही यह लागू है. जानकार मानते हैं कि इस क़ानून के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार को जितनी कोशिशें करनी चाहिए थीं उतनी की नहीं गईं और इसीलिए लोगों में अभी भी इस अधिकार को लेकर जागरूकता का अभाव है. अभियान देशभर में कई प्रमुख समाचार माध्यमों, 700 से ज़्यादा संगठनों और डेढ़ हज़ार कार्यकर्ताओं की मदद से शुरू किए गए अभियान के पीछे यही कारण बताया जा रहा है कि इससे लोगों में इस कानून के बारे में जागरूकता तो फैलेगी ही. साथ ही लोग इसके इस्तेमाल से बग़ैर रिश्वत दिए सरकारी विभागों में अपने काम रहा सकेंगे. अभियान के बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली में एक समाजसेवी संस्था परिवर्तन के एक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने बीबीसी को बताया, "लोगों को लगता है कि बग़ैर रिश्वत के सरकारी विभागों में न तो कोई काम करवाया जा सकता है और न ही कोई जानकारी हासिल की जा सकती है पर अब ऐसा नहीं है. लोगों के पास कानून है और अब ज़रूरत इसका प्रयोग करने की है." उन्होंने बताया कि अभियान ने एक ऐसी वेबसाइट भी तैयार की है जिसपर कोई भी व्यक्ति सूचना के अधिकार कानून के तहत किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी माँगने के लिए अपना आवेदन तैयार कर सकता है. लोग अपने आवेदनों में सरकार से क्या पूछें, सवाल कैसे लिखे जाएँ और तकनीकी तौर पर किन बातों को ध्यान में रखने की ज़रूरत है, इस बारे में यह वेबसाइट लोगों की मदद करेगी. इसके अतिरिक्त हेल्पलाइन नंबर, एसएमएस सेवा और सीधे शिविरों में आकर भी लोग इस अभियान का लाभ उठा सकते हैं. सुधार की आस देशभर में इस अभियान से जुड़े संगठनों को इस अभियान के काफ़ी अपेक्षाएँ हैं क्योंकि पहले दिन से ही देशभर में बड़े पैमाने पर आम लोगों ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को लेकर इस कानून के तहत आवेदन किया. राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत राज्य के 10 ज़िलों में यह अभियान शुरू हुआ है. इस बारे में जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने बीबीसी को बताया, "सरकार को चाहिए कि लोगों को सूचना का अधिकार कानून के बारे में जानकारी दे पर सरकार तो इससे बचना चाहती है. ऐसे में जनसंगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. सरकार क्या नहीं कर रही है उसे अभियान उजागर करेगा." ख़ास बात यह है कि अभियान को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें भी सचेत हो गई हैं. केंद्र सरकार के कर्मिक विभाग ने तो सभी सरकारी विभागों को एक निर्देश जारी किया है जिसके तहत विभागों से कहा गया है कि लोगों के आवेदनों पर तेज़ी से काम करते हुए उन्हें माँगी गई सूचनाएँ उपलब्ध कराई जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें अरुणा का सलाहकार परिषद से इस्तीफ़ा21 जून, 2006 | भारत और पड़ोस बहुत महंगी पड़ रही है सूचना19 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भ्रष्टाचार को सार्वजनिक करना ही मक़सद'11 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सूचना के अधिकार में संशोधन 02 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में सूचना का अधिकार मिला12 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'जनआंदोलनों को राजनीति में आना ही होगा'10 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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