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आईटी कंपनियों का चहेता है बंगलौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बंगलौर को भारत की आईटी राजधानी कहा जाता है. यहाँ 1584 आईटी कंपनियाँ मौजूद हैं जिसमें से 512 विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हैं. लोगों का मानना है कि बेहतर मौसम के साथ बंगलौर आईटी क्षेत्र की कई मूलभूत ज़रूरतों को पूरा कर रहा है जो किसी और शहर में मिलना मुश्किल है. यह मुख्य आकर्षण है इंजीनियरों की बड़ी संख्या और अमरीका के मुक़ाबले में कम वेतन. वमोक्शा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पवन कुमार कहते हैं कि भारत में और यहाँ भी बंगलौर में अपना काम करवाने का मुख्य आकर्षण है कम ख़र्च. हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में बंगलौर में महँगाई बढ़ी है. हैदराबाद और पुणे में आईटी कर्मचारियों के वेतन बंगलौर से छह-सात प्रतिशत कम हैं इसके बावजूद देशभर की कंपनियाँ बंगलौर में अपना काम स्थापित कर रही हैं. इसकी वजह यह है कि बंगलौर में मौसम न अधिक गरम होता है और न ही अधिक ठंडा. मुनाफ़ा जहाँ सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर को भारत में सालाना दो-ढाई लाख रुपए मिलते हैं उसी काम के लिए अमरीका में एक कंपनी को 45 लाख रुपए सालाना वेतन देना पड़ता है. टीवीए इंफ़ोटेक बंगलौर की सबसे बड़ी कंपनी है जो आईटी इंजीनियरों की नियुक्ति करती है. टीवीए के सीईओ गौतम सिन्हा कहते हैं, "बंगलौर में काम कराके अमरीकी और यूरोपीय कंपनियाँ इस क़दर बचत कर रही हैं कि कई वर्षों तक बंगलौर दुनियाभर में आईटी कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा." साथ ही पिछले दशक में इतनी नई कंपनियों ने दफ़्तर खोले हैं कि बड़ी संख्या में अनुभवी आईटी कर्मचारी उपलब्ध हैं. बंगलौर के अख़बारों में हर दिन हज़ारों पदों के लिए कंपनियाँ इश्तिहार देती हैं. गौतम सिन्हा कहते हैं कि केवल ऐसा नहीं है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ यहाँ कम ख़र्च में काम करवा सकती हैं बल्कि जब चाहे नई नियुक्तियाँ भी कर सकती हैं. ऐसा भी होता है जब किसी भारतीय कंपनी को किसी कार्य के लिए ठेका मिलता है तो उसे उस विशेष प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए कई बार दो-चार दिन में नियुक्तियाँ करनी पड़ती हैं. चिंता मौसम, सस्ते दाम पर काम और अधिक संख्या में अनुभवी इंजीनियरों के साथ एक और महत्वपूर्ण कारण यह माना जाता है कि दिल्ली और मुंबई के तरह बंगलौर में विभिन्न राज्यों, भाषाओं और वर्गों के नौजवानों के रोज़गार करने से शहर की संस्कृति किसी भी बड़े शहर के मुकाबले कम नहीं है.
स्थानीय भाषा कन्नड़ की जानकारी आवश्यक नहीं है. हिंदी और अंग्रेज़ी बोलने वाले को बंगलौर में अधिक समस्या नहीं होती. पर बंगलौर में आईटी कंपनियों के आते रहने की संभावना को लेकर कुछ सवाल भी हैं. शहर का मूल ढाँचा इतना ख़राब हो रहा है कि कई कंपनियाँ अपने नए दफ़्तर कोलकाता, चेन्नई और पुणे में लगाने की बात करने लगी हैं. क्रॉस डोमैन्स के सीईओ एलएस राम कहते हैं कि शहर की इन विशेषताओं के साथ-साथ यह ज़रूरी है कि बंगलौर के मूल ढाँचे में सुधार हो, नहीं तो आने वाले वर्षों में बंगलौर की तुलना में बाकी शहर जैसे चेन्नई, पुणे और कोलकाता बाज़ी मार जाएँगे. ग़ौरतलब है कि कर्नाटक भारत का पहला राज्य है जहाँ निजी शैक्षिक संस्थानों की स्थापना हुई थी. कर्नाटक के शैक्षिक संस्थानों में 45 हज़ार इंजीनियरिंग की सीटें हैं जबकि 93 हज़ार तमिलनाडु में हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें विप्रो ने दोहराया इंफ़ोसिस का कारनामा16 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस मिसाल बनीं नोरती बाई | भारत और पड़ोस गेट्स भारी निवेश करेंगे | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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