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बंगलौर में बच्ची का असाधारण ऑपरेशन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बंगलौर में डॉक्टरों की एक टीम दो साल की बच्ची का असाधारण ऑपरेशन कर रही है जो 40 घंटे तक चल सकता है. डाक्टरों की टीम शिफ़्टों में काम करते हुए चार हाथ और चार पाँव वाली बच्ची का ऑपरेशन कर रही है. डाक्टरों का कहना है कि लक्ष्मी तात्मा नाम की ये बच्ची कमर पर जुड़वाँ बच्चे से जुड़ी है और इसीलिए उसके चार हाथ और चार पाँव हैं. जुड़वाँ बच्चे का सिर नहीं है. बच्ची की रीढ़ की हड्डी और गुर्दे को जुड़वाँ बच्चे से अलग किया जाएगा ताकि वह सामान्य जीवन व्यतीत कर सके. 'चालीस घंटे का ऑपरेशन' डॉक्टर शरन पाटिल इस डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमने सर्जरी शुरु कर दी है लेकिन ये अभी प्रारंभिक दौर में है." उनका कहना है, "हम 40 घंटे के ऑपरेशन के लिए तैयार हैं. लेकिन यदि सभी ठीक चलता है तो सर्जरी काफ़ी जल्दी भी पूरी हो सकती है." डाक्टर पाटिल ने बीबीसी को बताया, "मैने बिहार राज्य की इस बच्ची के बारे में सुना था कि उसे विशेष मदद की ज़रूरत है. मैं नेपाल की सीमा से सटे बिहार के उस गाँव में पहुँचा जहाँ ये बच्ची थी." उनका कहना है कि उन्हें ये देखकर बहुत दुख हुआ कि बच्ची को लगातार बुखार चल रहा था और उसे किसी तरह की चिकित्सक मदद नहीं मिल रही थी. डॉक्टर पाटिल का कहना था कि बच्ची के माता-पिता उसके भविष्य के बारे में सोचते हुए उत्सुक थे कि सर्जरी की जाए, लेकिन कुछ गाँववाले और बच्ची के रिश्तेदार सर्जरी के पक्ष में नहीं थे. ग़ौरतलब कि चार पाँव और चार हाथ वाली बच्ची को कुछ गाँववालों ने 'हिंदू देवी लक्ष्मी के पुनर्जन्म' की संज्ञा दी है. आपस में जुड़े हुए जुड़वाँ बच्चे आमतौर पर दो लाख बच्चों में एक के अनुपात से पैदा होते हैं. और आमतौर पर इनमें से पाँच से 25 प्रतिशत तक ही जीवित रह पाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बहनों के ऑपरेशन को डॉक्टर तैयार 04 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान स्तन कैंसर की ज़्यादा मार ग़रीबों पर07 मार्च, 2007 | विज्ञान सिर से जुड़ी बहनों का ऑपरेशन10 सितंबर, 2005 | विज्ञान रेडियो तरंगों से दिल का हाल25 नवंबर, 2002 | विज्ञान हृदय की रसौली का पहला सफल ऑपरेशन21 जून, 2007 | विज्ञान ज़्यादा वज़न, हृदय रोगों का ख़तरा ज़्यादा26 सितंबर, 2004 | विज्ञान 'दुबले लोगों को भी हृदय रोग का ख़तरा'07 मार्च, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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