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ज़्यादा वज़न, हृदय रोगों का ख़तरा ज़्यादा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विशेषज्ञों के अनुसार जिन बच्चों का वज़न ज़्यादा होता है उन्हें 65 साल की उम्र से पहले दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा पाँच गुना ज़्यादा रहता है. यह चेतावनी विश्व हृदय दिवस पर दी गई है. रविवार को दुनिया के लगभग सौ देशों में हृदय दिवस मनाया जा रहा है. इस अवसर पर विशेषकर विकासशील देशों में मोटापे के दुष्प्रभाव के बारे में चिन्ता जताई गई है. चिन्ता इस बात पर है कि बच्चों की जीवनशैली ऐसी होती जा रही है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकर है. आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटन में 10 साल की उम्र वाले तीन बच्चों में से एक बच्चा ज़रूरत से ज़्यादा मोटा है जिसकी वजह से दिल की बीमारी जैसी गंभीर बीमारियाँ कम उम्र में ही हावी होने लगती हैं. व्यायाम का महत्व इसका एक बड़ा कारण व्यायाम की कमी को माना गया है. वर्ल्ड हार्ट फाउन्डेशन का अनुमान है कि दो तिहाई बच्चे शारीरिक रूप से उतने सक्रिय नहीं हैं जितना उन्हें स्वस्थ रहने के लिए होना चाहिये. वे फल और सब्ज़ियां उतना नहीं खाते जितना अच्छी सेहत के लिये ज़रूरी होता है. इसके अलावा कम उम्र में धूम्रपान की आदत बढ़ रही है. आज की दुनिया में 25 प्रतिशत छात्र धूम्रपान करने लगते हैं और बहुत से बच्चों को यह बुरी आदत 10 साल की उम्र से ही लग जाती है. जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती है, उन्हें मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अगर इस बारे में रवैया और आदतें नहीं बदलीं तो सन् 2010 तक विकासशील देशों में दिल की बीमारियाँ मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बन जायेंगी. |
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