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स्तन कैंसर की ज़्यादा मार ग़रीबों पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि ग़रीब पृष्ठभूमि की महिलाओं में स्तन कैंसर से बचने की दर, उच्च जीवन स्तर की महिलाओं का अपेक्षा कम होती है. इंग्लैंड में 13 हजार मरीज़ों पर किए गए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है. अध्ययन में पाया गया कि ग़रीब पृष्ठभूमि की महिलाएँ शुरुआती दौर में ही इस बीमारी की पहचान नहीं कर पाती जिस समय इसका उपचार सबसे अधिक प्रभावी हो सकता है. वे सर्जरी या रेडियोथेरैपी जैसे उपाय भी कम ही अपनाती हैं. स्तन कैंसर के प्रचलित उपचारों में दो प्रमुख उपचार हैं- लुम्पेक्टोमी और मास्टेक्टोमी. लुम्पेक्टोमी तकनीक में स्तन को पूरी तरह से नहीं हटाया जाता है जबकि मास्टेक्टोमी में इसे पूरी तरह से हटाना पड़ता है. ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ कैंसर के इस अध्ययन में यह पाया गया कि धनाढ्य वर्ग की महिलाओं में से 40 फ़ीसदी ने लुम्पेक्टोमी का रास्ता अपनाया जबकि गरीब महिलाओं में इसका प्रतिशत मात्र 31 था. उनका मानना है कि ग़रीब पृष्ठभूमि की महिलाएँ ज्यादातर मास्टेक्टोमी उपचार का रास्ता अपनाती हैं क्योंकि यह एकबार में ही हो जाता है. जबकि लुम्पेक्टोमी में रेडियोथेरैपी के साथ-साथ क्लिनिक का नियमित दौरा करना पड़ता है जो ग़रीब महिलाओं के लिए कठिन और खर्चीला होता है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि अमीर महिलाओं की 13 फ़ीसदी के मुकाबले ग़रीब पृष्ठभूमि की 22 फ़ीसदी से भी ज्यादा महिलाओं ने अपनी सर्जरी नहीं करवाई. देर से बीमारी का पता चलना इस असामनता का एक प्रमुख कारण रहा है. लेकिन शोधकर्त्ताओं ने यह भी पाया कि ग़रीब पृष्ठभूमि की महिलाओं में दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का होना भी इसका एक कारण रहा है. इसके चलते वे सर्जरी के लिए अयोग्य हो जाती हैं और यह विकल्प नहीं अपनातीं. वंचित तबकों की महिलाओं को रेडियोथेरैपी कम ही नसीब हो पाता है और उनके जीवित रहने की दर भी औसतन महज़ पाँच साल ही होती है. | इससे जुड़ी ख़बरें कैंसर से जूझ रही हैं काइली मिनोग17 मई, 2005 | पत्रिका काइली मिनोग का सफल आपरेशन21 मई, 2005 | पत्रिका स्तन कैंसर की जाँच की नई विधि20 अगस्त, 2006 | विज्ञान एस्प्रिन कैंसर रोकने में 'मददगार'05 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान कैंसर के ‘जीन कोड’ का पता चला29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान जहाँ चाह वहाँ राह संभव हो जाती है08 नवंबर, 2006 | पत्रिका कैंसर उपचार कोशिकाओं के लिए घातक30 नवंबर, 2006 | विज्ञान मुर्गी के अंडों से कैंसर का इलाज 15 जनवरी, 2007 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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