BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 21 जून, 2007 को 16:34 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
हृदय की रसौली का पहला सफल ऑपरेशन

अस्पताल के डॉक्टरों को मरीज की जान बचाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा
बंगलौर के वोकहार्ड अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों ने एक बहुत ही असामान्य बीमारी का इलाज करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है.

वोकहार्ड अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके 22 वर्षीय मरीज़ प्रभुराम के हृदय की रसौली निकाल दी और अब प्रभुराम बंगलौर में ही आराम कर रहे हैं.

अस्पताल के दो वरिष्ठ सर्जनों ने यह कमाल कर दिया, इनमें से एक डॉक्टर एनएस देवानंद ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "मरीज़ ऐसी अवस्था में था कि दो-चार दिनों के भीतर ऑपरेशन नहीं होने पर उसकी मौत हो सकती थी, क्योंकि उसकी धमनियों के रक्तप्रवाह में अवरोध बन गया था."

 हृदय में ट्यूमर होने के सिर्फ़ तीन मामले दुनिया भर में ज्ञात हुए हैं जिनमें से किसी का अब तक सफलतापूर्वक इलाज नहीं किया जा सका था
डॉक्टर एनएस देवानंद

डॉक्टर देवानंद का कहना है कि ये मेडिकल साइंस के इतिहास में "पहली बार है कि दिल के प्रीमीटिव न्युरेक्टोडर्मल ट्यूमर को सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया है."

यह बीमारी कितनी असामान्य है इसके बारे में डॉक्टर देवानंद कहते हैं कि "हृदय में ट्यूमर होने के सिर्फ़ तीन मामले दुनिया भर में ज्ञात हुए हैं जिनमें से किसी का अब तक सफलतापूर्वक इलाज नहीं किया जा सका था."

हृदय लगातार धड़कता रहता है इसलिए उसमें रसौली (ट्यूमर) के पनपने और बढ़ने की संभावना नहीं होती.

दरअसल, दिल का ट्यूमर कैंसर में तब्दील हो जाता है और इसका इलाज करना और मुश्किल हो जाता है, डॉक्टर देवानंद कहते हैं कि इस अवस्था के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है.

जान का ख़तरा

वोकहार्ड अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल बाली ने बीबीसी को बताया कि इससे पहले के तीनों मामले में ऑपरेशन की कोशिश नहीं की गई थी. दो मामलों में तो कीमोथेरेपी से ही इलाज करने की कोशिश की गई थी और एक मामले में हृदय प्रतिरोपण किया गया था.

विशाल बाली ने बताया कि प्रभुराम के मामले में डॉक्टरों को लगा कि इंतज़ार नहीं किया जा सकता क्योंकि मामला इतना गंभीर था कि मरीज को 48 या 72 घंटों से अधिक नहीं बचाया जा सकता था.

वे बताते हैं कि पहले डॉक्टरों ने ट्यूमर को हटाया फिर दिल के अलग-अलग हिस्सों का पुनर्निर्माण किया.

राजस्थान के पाली ज़िले के मूल निवासी बंगलौर में एक दुकान में काम करते थे, उन्होंने बीबीसी को बताया कि उनके इलाज में दो लाख रुपए का ख़र्च आया.

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इलाज का बहुत सा खर्च उन्होंने ख़ुद वहन किया और मरीज को फ़ीस में भी क़रीब एक लाख रुपए की छूट दी गई.

एक साल पहले ही प्रभुराम की शादी हुई है और उनकी पत्नी अभी पाली में रहती हैं.

फ़िलहाल उन्हें कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल जाना पड़ता है लेकिन वे अब स्वस्थ हैं और लगता है कि जल्दी ही काम पर लौट पाएँगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
रेडियो तरंगों से दिल का हाल
25 नवंबर, 2002 | विज्ञान
बिना बेहोशी हृदय का ऑपरेशन
14 अगस्त, 2003 | विज्ञान
कमज़ोर दिलों के लिए उम्मीद
23 अगस्त, 2003 | विज्ञान
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>