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तापमान की स्थिति बदतर हो सकती है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के महासागरों की ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइआक्साइड जज़्ब करने की क्षमता कम हुई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भूमंडलीय तापमान की स्थिति और भी बदतर हो सकती है. यूनिवर्सिटी आफ़ ईस्ट एंग्लिया के शोधकर्ताओं ने स्वचालित उपकरणों से लैस व्यापारिक जहाज़ों द्वारा समुद्र में जज़्ब होने वाली कार्बन डाइआक्साइड के 90 हजार से भी ज़्यादा नमूने लिए. उत्तरी एटलांटिक में दस वर्षों तक हुए इस अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि 1990वें दशक के मध्य में और वर्ष 2000 से 2005 के बीच जज़्ब होने वाली कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा लगभग आधी हो गई है. शोधार्थियों ने कहा कि जर्नल आँफ़ जीओफ़िज़ीकल रिसर्च के एक पेपर में प्रकाशित निष्कर्ष काफ़ी आश्चर्यजनक और चिंताजनक थे. इसमें यह मानने के पर्याप्त आधार थे कि कुछ समय में समुद्र हमारे द्वारा उत्सर्जित गैसों से संतृप्त हो जाएगा. बदलाव किस कारण आया? बीबीसी के पर्यावरण विश्लेषक रॉजर हाराबिन कहते हैं, "शोधकर्ता यह नहीं जानते कि यह बदलाव पर्यावरण के बदलाव के कारण है या प्राकृतिक परिवर्तनों के कारण." वे कहते हैं, "शोधकर्ता कहते हैं कि यह बेहद आश्यर्यजनक है और बहुत चिंताजनक भी, क्योंकि इसे मानने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं कि कुछ ही समय में समुद्र हमारे उत्सर्जन से इतना संतृप्त हो जाएँगे." उन्होंने कहा कि इसके बाद होने वाला उत्सर्जन हमारे वातावरण को और भी गर्म बनाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तरी ध्रुव पर गर्म हवाओं का असर18 अक्तूबर, 2007 | विज्ञान चीन के सामने पर्यावरण की कठिन चुनौती08 मई, 2007 | विज्ञान लेबनान में लड़ाई से पर्यावरण संकट02 अगस्त, 2006 | विज्ञान 'पर्यावरण की रक्षा में निजी क्षेत्र प्रभावी'11 जनवरी, 2006 | विज्ञान एवरेस्ट के पर्यावरण संतुलन को ख़तरा01 जून, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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