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उत्तरी ध्रुव पर गर्म हवाओं का असर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भूमंडलीय तापमान के असर पर आधारित अमरीकी सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी ध्रुव पर गर्म हवाओं के कारण बर्फ़ पिघल रही है और वन्य संपदा नष्ट होती जा रही है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि हवाओं के संचलन के नए रुख़ के कारण उत्तरी ध्रुव की ओर चल रही हवाएं 20वीं शताब्दी में चलने वाली हवाओं से भी ज़्यादा गर्म हैं. अब टुंड्रा क्षेत्र जहाँ ख़ासी ठंड रहती है, वहाँ झाड़ियाँ उगने लगी हैं. उधर कनाडा और अलास्का में मिलने वाले कारिबू (बारहसिंगे की एक विशेष प्रजाति) की संख्या घटने लगी है. इस रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि उत्तरी ध्रुव का भविष्य पूरी पृथ्वी को प्रभावित करेगा. 'द यूएस नेशनल ओशनिक एंड एट्मॉस्फ़ैरिक एडमिनिस्ट्रेशन' (एनओएए) रिपोर्ट के अनुसार 2007 में सर्दियों और वसंत के मौसम का तापमान पूरे उत्तरी ध्रुव क्षेत्र में औसत से ज्यादा है जैसा कि पिछले कुछ सालों में नहीं हुआ. एनओएए के जेम्स ओवरलैंड ने पत्रकारों को बताया, "यह एक असामान्य बात है और यह भूमंडलीय तापमान बढ़ने की शुरूआत का संकेत लगता है." समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि भूमंडलीय तापमान बढ़ने का असर सबसे पहले ध्रुवीय क्षेत्र को महसूस होगा. इन बदलावों के निर्धारण के लिए 2006 की 'यूएस स्टेट ऑफ़ द आर्कटिक रिपोर्ट' में मानदंड तय किए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन में सहमति10 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना 'ग्लोबल वॉर्मिंग' बहस में नया मोड़04 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन पर चीन की योजना04 जून, 2007 | पहला पन्ना धरती पर जीवन का एटलस02 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना पर्यावरण बड़ी समस्याः पावेल31 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान09 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना जलवायु मुद्दे पर अन्नान की चेतावनी15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'युद्ध जितना ख़तरनाक है जलवायु परिवर्तन'02 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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