|
दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप तैयार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप अंतरिक्ष को मापने के लिए तैयार है. इस दूरबीन के आकार का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें जो शीशा लगा है उसका व्यास क़रीब 10 मीटर से अधिक यानी कोई 35 फुट है. हालांकि इस दूरबीन को पूरी तरह से इस्तेमाल में लाना अगले कुछ महीनों में ही संभव हो पाएगा पर शुरूआती परीक्षणों से ही इसकी सफलता के संकेत मिलने लगे हैं. इस भारी भरकम दूरबीन को ग्रेट कैनेरी टैलीस्कोप या जीटीसी का नाम दिया गया है और इसे स्पेन के ला पाल्मा में स्थापित किया गया है. ग्रेट कैनेरी टेलीस्कोप को बनाने में कई साल लगे और बहुत मेहनत भी लगी है. इसमें कुल मिलाकर 17 करोड़ 60 लाख डालर का खर्चा आया. इसे तैयार करने में दिक़्कतें भी बहुत आईं. ख़राब मौसम तो एक वजह था ही साथ ही पुर्ज़ो को दूरबीन के लिए निर्धारित स्थान तक पहुँचाना आसान नहीं था क्योंकि सामान बहुत भारी था. शक्तिशाली इस दूरबीन को इतना शक्तिशाली माना जा रहा है कि ब्रह्माँड में चक्कर लगाती बहुत छोटी वस्तुओं को भी इससे देखा जा सकेगा. माना जा रहा है कि शोधकर्ताओं को ये जानने में भी मदद मिलेगी कि जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई थी और तारे किस तरह से बनते हैं. ज़मीन से इस्तेमाल में लाई जाने वाली भारी भरकम दूरबीनों को कुछ लोग ग़ैरज़रूरी बताते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में हब्बल और स्पीटज़र जैसी दूरबीनें पहले से मौजूद हैं और कुछ नई दूरबीनों को स्थापित किए जाने की योजना है. आपत्ति करने वालों का कहना है कि फिर ऐसे में ज़मीन से काम करने वाली दूरबीनों की क्या ज़रूरत है? लेकिन धरती पर दूरबीन लगाने का पक्ष लेने वालों के पास अपने तर्क हैं. ब्रिटेन में रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी के डा राबर्ट मैसी कहते हैं, "हब्बल दूरबीन के बाद जिस दूरबीन को अंतरिक्ष में स्थापित किए जाने की बात हो रही है उसे इस्तेमाल में लाना,, धरती से दूर अंतरिक्ष में स्थापित करना बहुत मुश्किल है. इसी वजह से ज़मीन से इस्तेमाल में लाए जाने वाली दूरबीनो को बनाया जाता है और ये अपेक्षाकृत कम खर्चीली भी होती हैं." ज़रूरी परीक्षणों के बाद जब इस दूरबीन को इस्तेमाल में लाया जाना शुरू हो जाएगा तो वैज्ञानिकों को उम्मीद कि बहुत से ऐसे रहस्यों पर से पर्दा उठ सकेगा जिनके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें कौरोट खगोलीय दूरबीन का प्रक्षेपण27 दिसंबर, 2006 | विज्ञान दसवें ग्रह की खोज की पुष्टि हुई30 जुलाई, 2005 | विज्ञान ग्रहों की परिभाषा फिर तय होगी 17 मार्च, 2004 | विज्ञान हबल टेलिस्कोप निष्क्रिय किया जाएगा17 जनवरी, 2004 | विज्ञान पृथ्वी मंगल के क़रीब 27 अगस्त, 2003 | विज्ञान अंतरिक्ष में नासा की दूरबीन25 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||