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कौरोट खगोलीय दूरबीन का प्रक्षेपण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में सौरमंडल के बाहर ग्रहों की जानकारी के लिए कैरोट मिशन को कज़ाकस्तान से छोड़ा गया है. कौरोट मिशन को ग्रीनविच समय के मुताबिक़ लगभग ढाई बजे बैकोनूर से छोड़ा गया.यह खगोलीय दूरबीन एक लाख बीस हज़ार सितारों के बारे में सर्वेक्षण करेगा. यह बहुराष्ट्रीय मिशन सीधी तौर पर सितारों का भी अध्ययन करेगा ताकि इस संबंध में उसके बारे में और सूचनाएं जमा की जा सकें. युरोपियन स्पेस एजेंसी(एसा) के एक प्रवक्ता का कहना है कि इसे सफलतापूर्वक छोड़ा गया. पृथ्वी से 827 किलोमीटर की ऊँचाई पर कौरोट अगले ढाई वर्षों तक सितारों का सर्वेक्षण करेगा. फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी नेस इस सिलसिले में आस्ट्रिया, स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम तथा ब्राज़ील के सहयोग से काम कर रही है. इस मिशन के लिए काम करने वाले वैज्ञानिक इयान रॉक्सबर्ग ने कहा, "इस मिशन का उत्तेजक पहलू पृथ्वी जैसे ग्रहों के बारे में पता लगाने की कोशिश करना है". उन्होंने कहा "संभव है कि ऐसे ग्रह पृथ्वी से कुछ बड़ा, चट्टानों से बने हों और उस पर भी जलवायु हो जहाँ जीवन की कुछ संभावना भी हो". कौरोट एक लाख सितारों पर पैनी नज़र रखेगा और प्रत्येक 150 दिन के बाद यह एक नए क्षेत्र में जाकर अपना काम करेगा. कौरोट का पहला लक्ष्य आकाश गंगा के केंद्र की और है. इसके बाद यह अपना लक्ष्य दूसरे सितारों की तरफ़ करेगा. समझा जा रहा है कि इसके द्वारा किए जाने वाले अध्ययन से अंतरिक्ष वैज्ञानिक सितारों के बारे में और विस्तार से समझ पाएंगे. आगामी कुछ वर्षों में उपग्रहों के बारे में अध्ययन करने के लिए भेजे जाने वाले अंतरिक्षयानों में से यह पहला है. | इससे जुड़ी ख़बरें अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की उड़ान टली 08 दिसंबर, 2006 | विज्ञान भारतीय दल अंतरिक्ष में भेजने का प्रस्ताव07 नवंबर, 2006 | विज्ञान सूर्य के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान23 सितंबर, 2006 | विज्ञान अंतरिक्ष यान डिस्कवरी से कुछ टुकड़े गिरे 04 जुलाई, 2006 | विज्ञान सौरमंडल के जन्म की खोज का प्रयास03 जुलाई, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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