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विशालकाय पेंग्विन का जीवाश्म मिला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने पेरू में विशालकाय पेंग्विन का जीवाश्म खोजा है. वैज्ञानिकों का दावा है कि ये जीवाश्म साढ़े तीन करोड़ वर्ष से भी अधिक पुराना है. ये पेंग्विन अधिकतर दक्षिणी महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाते थे. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज से पता चलता है कि इस प्रजाति के पेंग्विनों ने तीन करोड़ वर्ष पूर्व गर्म स्थानों का रुख करना शुरू कर दिया था. वैज्ञानिकों का कहना है कि पेरू के दक्षिणी तट पर खोजा गया यह जीवाश्म तीन करोड़ 60 लाख वर्ष पुराना है और पेंग्विन की इकडिपटिस सलासी नामक प्रजाति का है. विशेष प्रजाति पेंग्विन की यह प्रजाति इन दिनों पाई जाने वाली पेंग्विन से काफी बड़ी थी और इनकी ऊँचाई लगभग डेढ़ मीटर थी. यानी पृथ्वी पर वर्तमान में मौजूद पेंग्विन प्रजाति को इनके मुक़ाबले बौना कहा जा सकता है. यही नहीं इकडिपटिस पेंग्विन का सिर लंबा था और इसकी चोंच भाले जैसी नुकीली थी. ऐसा नहीं है कि इकडिपटिस ही पेंग्विनों की ऐसी प्रजाति थी जो गर्म स्थानों पर रहना पसंद करती थी, अफ़्रीकी या गालापैगो पेंग्विन भी दक्षिणी महासागर के गर्म पानी में रहना पसंद करते थे. शोध टीम की सदस्य और अमरीका के उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय की डॉ जूलिया क्लार्क का कहती हैं, "ऐसा माना जाता था कि पृथ्वी के इतिहास में तापमान में गिरने के दो महत्वपूर्ण समयकालों के बाद पेंग्विन ठंडे स्थानों तक पहुँचे, लेकिन हमने अपनी खोज में उन्हें गर्म स्थानों पर पाया है और वो भी बहुत-बहुत पहले." | इससे जुड़ी ख़बरें दो सिरों वाला अनोखा जीवाश्म20 दिसंबर, 2006 | विज्ञान क्या अमरीका में घूमेंगे चीते, हाथी..?19 अगस्त, 2005 | विज्ञान 'डायनासोर को खाने वाला जानवर भी था'13 जनवरी, 2005 | विज्ञान क्या हिम-युग लौट सकता है?13 दिसंबर, 2004 | विज्ञान हमारा पूर्वज साबित हो सकता है यह बंदर20 नवंबर, 2004 | विज्ञान भारत में डायनासोर!13 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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