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दो सिरों वाला अनोखा जीवाश्म | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों को पहली बार दो सिरों वाले सरीसृप का कोई जीवाश्म मिला है. डायनासोर के समय के किसी असामान्य जीव का यह अवशेष उत्तरी-पश्चिमी चीन में मिला है. नमूने से पता चलता है कि सरीसृप वर्ग यानी रेंगनेवाली प्रजाति का यह जलीय जीव जब मरा होगा तो उस समय बहुत कम उम्र का रहा होगा. कोरिस्टोडेरॉन नाम का यह सरीसृप जीव वयस्क होकर करीब एक मीटर का हो गया था. इसकी गर्दन लंबी थी और एक नहीं दो थी. इस जीव का मेरुदंड वहाँ से दो भाग में बँट गया था जहाँ से शरीर में गर्दन निकलना शुरु होता है. साढ़े छह से 15 करोड़ वर्ष पहले क्रिटेसियस काल में उत्तरी-पश्चिमी चीन में इन जलीय जीवों का पाया जाना आम था. दो मुहों वाले जीवित जीवों के तो कई उदाहरण मिलते हैं लेकिन सरीसृप वर्गों की कुल संख्या के हिसाब से ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है. रेंगने वाले आधुनिक जीवों में दो सिरों वाले जीवों की संख्या अपेक्षाकृत ज़्यादा है. दो सिरों वाले साँपों के अब तक चार सौ मामले देखने में आए हैं. माना जाता है कि दो सिरों की यह स्थिति भ्रूण में चोट की वजह से पैदा होती है. फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित अनुसंधान संस्था सीएनआरएस के निदेशक डॉ बफेटॉ ने बताया, "मेरी जानकारी में मेरूदंड वाले जीवों के जितने जीवाश्म मिले हैं, उनमें से कोई भी इस तरह का नहीं हैं." चीन के जिक्सियान में क्रिटेसियस चट्टानों से प्राप्त इस नमूने को अब दक्षिणी चीन के शेंझेन संग्रहालय में रखा गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ईंधन की कमी से जन्म दर घटेगी'13 फ़रवरी, 2004 | विज्ञान क्या पक्षियों के कभी चार पंख थे?21 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान प्राचीनतम कंकाल अमरीका जाएगा25 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला साँप27 जून, 2006 | विज्ञान दो मुँह वाले दुर्लभ साँप की बिक्री03 जनवरी, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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