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सुनीता ने लगाई अंतरिक्ष में लंबी दौड़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में रहते हुए मैराथन दौड़ में हिस्सा लेने वाली पहली अंतरिक्ष यात्री बन गई हैं. अमरीकी नौसेना में कमांडर के पद पर कार्यरत 41 वर्षीय सुनीता विलयम्स एक शौक़िया मैराथन धाविका हैं और उन्होंने बोस्टन मैराथन में हिस्सा लेने से पहले ह्यूस्टन मैराथन दौड़ साढ़े तीन घंटे में पूरी की थी. सुनीता के लिए शून्य गुरुत्वाकर्षण में दौड़ना असंभव था इसलिए उन्हें एक ट्रेडमिल पर जंजीरों की मदद से जकड़ दिया गया था. उनके दोनों तरफ़ दो लैपटॉप लगे थे जिस पर वे मैराथन का सीधा प्रसारण भी वे देख रही थीं. सुनीता ने दौड़ में हिस्सा लेने से पहले कहा था, "मैंने इस दौड़ के लिए क्वालीफ़ाई किया था और मैं इस मौक़े को गँवाना नहीं चाहती थी इसलिए मैंने यहीं से दौड़ने का फ़ैसला किया." मैराथन की 26 मील की दूरी सुनीता का अंतरिक्ष यान हर पाँचवे सेकेंड में पूरी कर रहा था, उनके अंतरिक्ष यान की गति साढ़े 17 हज़ार मील प्रति घंटा है. सुनीता साढ़े तीन घंटे अंतरिक्ष में दौड़ती रहीं और इस बीच उनके अंतरिक्ष यान ने धरती के दो चक्कर लगा लिए. सुनीता की बहन दीना पांड्या और दूसरे धावकों ने बोस्टन में जब दौड़ शुरू की, ठीक उसी वक़्त सुनीता ने भी दौड़ना शुरू किया. बोस्टन में सैकड़ों धावक-धाविकाएँ तेज़ बारिश के बीच दौड़ रहे थे वहीं अंतरिक्ष यान के बाहर का तापमान था शून्य से 135 डिग्री नीचे. सुनीता विलियम्स पिछले पाँच महीने से अंतरिक्ष में हैं, उन्होंने कहा कि इस दौड़ में हिस्सा लेकर वे यह संदेश देना चाहती हैं कि फ़िटनेस जीवन में कितना ज़रूरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें पहली महिला अंतरिक्ष पर्यटक रवाना18 सितंबर, 2006 | विज्ञान महिला अंतरिक्ष पर्यटक लौटीं29 सितंबर, 2006 | विज्ञान 'टुकड़े गिरना चिंता का कारण नहीं'05 जुलाई, 2006 | विज्ञान गूगल और नासा ने जोड़े तार19 दिसंबर, 2006 | विज्ञान सुनीता ने अंतरिक्ष में चहलक़दमी की17 दिसंबर, 2006 | विज्ञान डिस्कवरी ने उड़ान भरी10 दिसंबर, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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