|
गर्भाशय प्रतिरोपण से भेड़ें गर्भवती हुईं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्वीडन के वैज्ञानिकों के कहा है कि उन्होंने जिन भेड़ों के गर्भाशय हटाकर फिर से लगाए थे, उनमें से चार भेड़ें गर्भ धारण कर चुकी हैं. मानवों में गर्भाशय प्रतिरोपण करने की दिशा में इसे काफ़ी अहम माना जा रहा है. प्रोफ़ेसर मैट्स ब्रेन्नस्ट्रोम और उनके सहयोगियों ने 14 भेड़ों का गर्भाशय हटाकर उसे फिर से जोड़ा था. लेकिन न्यू सांइटिस्ट पत्रिका के मुताबिक जिन भेड़ों पर ये अध्ययन हुआ है उनमें से कई भेड़ों में जटिलताएँ पैदा हो गई हैं. सो इस प्रतिरोपण को सुरक्षित समझे जाने से पहले अभी काफ़ी काम होना बाकी है. इससे पहले चूहों में भी ये प्रयोग हो चुका है. गर्भाशय प्रतिरोपण इस साल के शुरू में न्यूयॉर्क में शोधकर्ताओं ने कहा था कि वे एक मृतक महिला के दान में दिए गए अंग को इस्तेमाल कर गर्भाशय प्रतिरोपण करना चाहते हैं. माना जा रहा है कि इसके ज़रिए वे महिलाएँ भी गर्भ धारण कर सकती हैं जिनके गर्भाशय में खराबी है या जिनका गर्भाशय हटाया जा चुका है. गर्भाशय प्रतिरोपण में सबसे बड़ी मु्श्किल है नसों को फिर से जोड़ना. गर्भ धारण होने के बाद तो नसों पर दबाव और पड़ने लगता है और इसका नतीजा काफ़ी खतरनाक हो सकता है. साथ ही एक खतरा ये भी है कि शरीर नए गर्भाशय को अस्वीकार कर सकता है. अगर ऐसा गर्भ धारण के बाद हो, तो ये खतरनाक है. वर्ष 2000 में सउदी अरब में एक महिला में गर्भाशय प्रतिरोपण की कोशिश की गई थी लेकिन उस समय गर्भाशय एक जीवित महिला ने दिया था. जिस महिला में गर्भाशय प्रतिरोपित किया गया था उसके शरीर ने इसे तीन महीने बाद अस्वीकार कर दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें चेहरे का प्रतिरोपण सफल होने का दावा04 जुलाई, 2006 | विज्ञान किसी ने नहीं देखा मुड़-मुड़के...11 जनवरी, 2006 | विज्ञान मानव भ्रूण की क्लोनिंग को अनुमति09 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान क्या बदल सकता है चेहरा भी?03 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||