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अब मच्छर ही निपटेंगे मलेरिया से | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में वैज्ञानिकों ने मच्छर की एक ऐसी प्रजाति विकसित की है जिसमें मलेरिया से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता है और उन्हें उम्मीद है कि इससे इस बीमारी से निपटने में मदद मिलेगी. ग़ौरतलब है कि मलेरिया से दुनिया भर में हर साल दस लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो जाती है, जिसमें से अधिकतर अफ्रीकी देशों के होते हैं. अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इनमें से कई लोगों की ज़िंदगी आनुवांशिक रूप से विकसित मच्छरों से बचाई जा सकता है. मलेरिया का परजीवी वायरस मादा मच्छरों के सहारे मनुष्य के शरीर तक पहुँचता है और हर साल लगभग तीस करोड़ लोग इस बीमारी के शिकार बनते हैं. मलेरिया विरोधी जीन जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन लोगों ने जो मच्छर की प्रजाति विकसित की है उसमें मलेरिया विरोधी जीन है और वे परजीवी के वाहक नहीं बन पाएँगे. वैज्ञानिक ने मच्छरों को तैयार करने के बाद पिंजरे में छोड़ दिया था. उनका कहना है कि अभी यह परीक्षण करना बाक़ी है कि ये जंगल में ज़िंदा रह पाएंगे या नहीं. अगर ये हो गया तो बहुत बड़ी सफलता होगी. वैज्ञनिक खुश इसलिए भी हैं क्योंकि ये सामान्य मच्छरों के मुक़ाबले मज़बूत और अधिक प्रजनन करने में सक्षम हैं. इससे आशा जताई जा रही है कि एक दिन ये मलेरिया परजीवी ले जाने में सक्षम मच्छरों से संख्या में अधिक हो जाएंगे और उन पर भारी पड़ने लगेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है लेकिन शुरुआती अनुसंधान से इस बात की उम्मीद बनी है कि प्रयोगशाला में तैयार मच्छर के सहारे मलेरिया का नामोनिशान मिटाया जा सकेगा. |
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