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'आर्टीसुनेट ज़्यादा कारगर दवा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की चिकित्सा पत्रिका द लेंसेट ने कहा है कि नए शोध से पता चला है कि मलेरिया के इलाज में क्विनीन के मुक़ाबले आर्टीसुनेट नाम की दवा ज़्यादा कारगर है. इस शोध में एशिया महाद्वीप में मलेरिया से गंभीर रुप से पीड़ित क़रीब 1500 मरीज़ों पर परीक्षण किया गया और यह शोध भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और बर्मा में किया गया था. शोध में पाया गया कि आर्टीसुनेट के इस्तेमाल के बाद मलेरिया से मरने वालों की संख्या 22 प्रतिशत 22 से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गई. शोधकर्ताओं ने कहा है कि लोगों को ये दवा जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जानी चाहिए. संवाददाताओं का कहना है कि वैज्ञानिकों को पहले से इस बात की जानकरी थी कि क्विनीन की तुलना में आर्टीसुनेट का असर जल्दी होता है और इसके दुष्प्रभाव भी क़म हैं लेकिन ये बात प्रमाणित नहीं हुई थी कि इससे मरनेवालों की संख्या क़म हो सकती है. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े एक विशेषज्ञ डॉक्टर पीटर ने आगाह किया है कि मलेरिया से मरने वाले ज़्यादातर लोग अफ्रीका में रहते हैं और ये बात निश्चित तौर पर नहीं कही जा सकती कि अफ्रीका में आर्टीसुनेट कारगार साबित होगी या नहीं. |
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