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मलेरिया पर स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया से निबटने के अपने विश्वव्यापी अभियान की प्रगति के बारे में अपनी पहली विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. मलेरिया से अफ़्रीका में ही हर साल लगभग दस लाख लोगों की मौत हो जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह अभियान पाँच साल पहले शुरू किया गया था और इसका लक्ष्य था 2010 तक इस बीमारी से होने वाली मौतों में पचास प्रतिशत कमी ले आना. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमारी पर क़ाबू पाने वाले उपायों से फ़र्क़ पड़ रहा है लेकिन बीबीसी के स्वास्थ्य संवाददाताओं का कहना है कि पहली नज़र में इस बात के ठोस सुबूत नहीं मिलते हैं कि इसकी आलोचना ग़लत है. उनका कहना है कि इस बीमारी का शिकार होने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और अब भी प्रतिवर्ष लगभग पचास करोड़ लोग मलेरिया का निशाना बनते हैं. लेकिन एशिया और लातिन अमरीका में मलेरिया के मामलों मे कमी आई है. हालाँकि दुनिया भर में इस बीमारी में कमी लाने के लिए प्रतिवर्ष 3.2 अरब डॉलर की ज़रूरत है. उसके अलावा मलेरिया की नई दवाई की उपलब्धता भी एक बड़ा मसला है. कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले साल लाखों टन दवाई की कमी सामने आ सकती है. रोल बैक मलेरिया अभियान और यूनिसेफ़ इस बात को मानते हैं कि दवाई की आपूर्ति को लेकर कुछ समस्या है लेकिन उन्हें विश्वास है कि यह पर्याप्त रहेगी. लेकिन वे दुनिया भर में इस तरह के मामलों की निगरानी और इस पर क़ाबू पाने के उपायों के लिए संसाधन जुटाने के मामलों को लेकर ज़रूर चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं. |
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