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किशोरों की चंचलता का ज़िम्मेदार हार्मोन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ये तो जगजाहिर है कि किशोरों के चंचल चित्त के लिए हार्मोन ज़िम्मेदार हैं लेकिन अब अनुसंधानकर्तोओं ने इस हार्मोन की पहचान करने का दावा किया है. न्यूयॉक के स्टेट यूनिवर्सिटी की एक शोध टीम ने कहा है कि उन्होंने उस हार्मोन की पहचान कर ली है जो चिंता को दबाने का काम करती है लेकिन किशोरों पर इसका उल्टा असर होता है. 'नेचर न्यूरोसाइंस' में लिखे लेख में अनुसंधनकर्ताओं ने कहा है कि प्रौढ़ या यौवन के प्रभाव को विपरीत दिशा में ले जाना संभव है. शोध टीम का यह भी कहना है कि इस खोज से शिक्षकों और मात-पिता को किशोरों को समझने में काफ़ी मदद मिलेगी. दरअसल दबाव की वजह से सामान्यतः टीएचपी नामक हार्मोन निकलता है और इससे दिमाग की क्रियाएं शांत होती हैं. जिससे कुछ लोगों को तनाव से मुक्ति पाने में मदद मिलती है. लेकिन चूहों पर किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि युवाओं पर इसका कुछ अलग प्रभाव होता है. इस हार्मोन के ग्राही तत्व उस हिस्से में होते है जहाँ से युवा अवस्था में भावनाओं को नियंत्रित किया जाता है. इस शोध का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर शेरिल स्मिथ कहती हैं कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ऐसा क्यों होता है. उनका मानना है कि ऐसा दूसरे हार्मोनों की वजह से होता है. डॉक्टर स्मिथ और उनकी टीम आनुवांशिक रूप से हार्मोन को ग्रहण करने वाले तत्व को बदलने में सफलता हासिल कर ली है, इससे युवा मन को प्रभावित किया जा सकता है. वे कहती हैं कि इस हार्मोन के प्रभाव को पूरी तरह से ख़त्म भी किया जा सकता है लेकिन इसके लिए अभी और अनुसंधान की ज़रूरत है. | इससे जुड़ी ख़बरें अब आएगी मर्दों के लिए गोली30 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान ज़्यादा ग़ुस्सा यानी जिगर को ख़तरा31 अगस्त, 2006 | विज्ञान टेलीविज़न 'दर्द निवारक' भी है19 अगस्त, 2006 | विज्ञान सिर्फ़ एक झलक तोड़ सकती है ध्यान20 अप्रैल, 2006 | विज्ञान चुंबन ला सकता है दिमाग़ में सूजन10 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान महिलाएँ सुरक्षित ड्राइवर क्यों?07 नवंबर, 2005 | विज्ञान आलिंगन स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी10 अगस्त, 2005 | विज्ञान च्युइंग गम से शरीर बेहतर होगा18 मार्च, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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