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मंगल ग्रह से मिली अंतरिक्ष-यान को ऊर्जा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक यूरोपीय अंतरिक्ष-यान अपनी यात्रा के दौरान मंगल ग्रह के पास से गुज़रा और मंगल के गुरुत्वाकर्षण बल से ऊर्जा लेकर अपनी गति तेज़ की. ये यान बृहस्पति(ज्यूपिटर) ग्रह के निकट एक धूमकेतु पर जा रहा था. रोसेटा नाम के इस मानवरहित अंतरिक्ष-यान को 10 साल में अपनी यात्रा पूरी करनी है. रोसेटा मंगल ग्रह से 250 किलोमीटर की दूरी से गुज़रा और मंगल के गुरुत्वाकर्षण से अपनी चाल तेज़ की. रोसेटा यान 2014 में चुर्युमोव-गेरासिमेन्को धूमकेतु की कक्षा में पहुँचकर उसकी संरचना और विज्ञान को समझने की कोशिश करेगा. अभी तक ऐसी कोई तकनीकी इज़ाद नहीं हुई है जिसके तहत इतनी दूरी पर कोई यान जाँच के लिए भेजा जा सके. इसलिए यान मंगल और पृथ्वी ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल से अपना वेग प्राप्त कर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है. रहस्य यह पहली कोशिश थी कि जब रोसेटा यान मंगल ग्रह के पास से गुज़रा. अंतरिक्ष-यान कार्रवाई के प्रबंधक ऐंद्रिया अकोमाज़ो ने कहा कि मंगल ग्रह से गुरुत्वाकर्षण बल प्राप्त करने की ये युक्ति इस मिशन का आधार थी. जर्मनी में डामस्टर्ड स्थित मिशन नियंत्रण केंद्र में विशेषज्ञों के पूर्वानुमान अनुसार यान का केंद्र से संपर्क टूट गया और वो 15 मिनट के लिए मंगल ग्रह के पीछे चला गया. इस दौरान, रोसेटा को ऊर्जा के लिए यान की बैटरियों पर निर्भर होना पड़ा क्योंकि मंगल ग्रह ने यान के सौर्य-पैनलों पर प्रकाश डालना बंद कर दिया था. 15 मिनट बाद जब यान से रेडियो संपर्क हुआ तो नियंत्रण-कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा. उन्होंने कहा,"ये एक बड़ी सफलता है और इससे हम बहुत ख़ुश हैं." अभियान के दौरान यान को दो बार इसी तरह से दो बार धरती के पास गुज़ारा जाएगा जिससे उसके वेग में इज़ाफा किया जा सके. इस यान का नाम रोसेटा पत्थर के नाम पर रखा गया है जिसकी मदद से विशेषज्ञों को मिस्र के लेखों और प्रतीकों को समझने में सहायता मिली. वैज्ञानिकों का मानना है कि अपनी धेमकेतु-यात्रा के दौरान रोसेटा यान सौर्य-मंडल के कुछ अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्रहों की संख्या 12 करने की योजना16 अगस्त, 2006 | विज्ञान सूर्य के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान23 सितंबर, 2006 | विज्ञान सूर्य के अध्ययन के लिए उपग्रह रवाना26 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान 'मंगल उम्मीद से कहीं अधिक सक्रिय ग्रह'21 सितंबर, 2005 | विज्ञान मुस्कुराता हुआ मंगल12 अप्रैल, 2006 | विज्ञान 'ऑपर्चुनिटी' का वापस लौटना मुश्किल09 नवंबर, 2006 | विज्ञान 'मंगल की सतह पर बहा पानी'07 दिसंबर, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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