BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 13:10 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
भारत-चीन करेंगे हिमालय का अध्ययन
हिमालय
दोनों देश हिमालय पर मौजूद ग्लैशिरर्स के पिघलने को लेकर चिंतित हैं
भारत और चीन धरती के बढ़ते तापमान के कारण हिमनदों पिघलने का अध्ययन करने के लिए एक दल भेजने को राज़ी हो गए हैं.

उन्हें डर है कि इन पिघलते ग्लैश्यिरों की वजह से उन नदियों में भीषण बाढ़ आ सकती है जिनके किनारें लाखों लोग बसते हैं.

दोनों देशों के वैज्ञानिक और पर्वतारोही अब दो महत्वपूर्ण नदियों सतलुज और ब्रह्मपुत्र के स्रोत की ओर जाने की योजना बना रहे हैं.

पिछले सप्ताह आई एक रिपोर्ट के मुताबिक एशिया में वातावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गैसों का उत्सर्जन अगले पच्चीस साल में तीन गुना बढ़ जाएगा.

एशियन डेवेलपमेंट बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में वाहनों की बढ़ती संख्या का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन पहले से ही विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले तीस सालों में वहाँ वाहनों की संख्या पंद्रह फीसदी बढ़कर उन्नीस करोड़ से ज़्यादा हो जाएगी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अगले तीस सालों में भारत में भी वाहनों की संख्या में इतनी ही वृद्धि की संभावना होगी.

चीन में वाहनों से निकलने होने वाली कार्बन डायऑक्साइड गैस की मात्रा में 3.4 गुना और भारत में 5.8 गुना की वृद्धि हो सकती है.

पिघलती बर्फ

दिल्ली से बीबीसी संवाददाता मार्क डम्मेट ने कहा कि दोनों देशों के वैज्ञानिक और पर्वतारोही अब सतलुज और ब्रह्मपुत्र के स्रोत की ओर जाने की योजना बना रहे हैं.

तिब्बत के पर्वतों से बहकर आई ये दोनों नदियाँ गंगा और सिंधु नदियों के साथ मिलकर उत्तर भारत और पड़ोसी देशों के करोड़ों लोगों को पानी उपलब्ध कराती हैं.

बाढ़ तो तात्कालिक समस्या है लेकिन जब ये ग्लैशियर पिघल कर खत्म हो जाएंगे तो ये नदियाँ भी हर साल कुछ समय के लिए सूख जाएँगी क्योंकि इनके स्रोत ये ग्लैशियर ही हैं.

भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के निदेशक और इस दल के अगुआ एचपीएस अहलूवालिया ने कहा कि ग्लैशियर और हिम सतह का पिघलना‘ हिमालय में उत्पन्न हुआ संकट है.

अहलूवालिया ने कहा कि माउंट गैंग रिन्पोशे या माउंट कैलाश के चारों तरफ के क्षेत्र का अध्ययन पिछली बार एक शताब्दी पहले किया गया था.

वैज्ञानिक कहते हैं कि उनके अध्ययन से पूरे क्षेत्र में जल संसाधनों के प्रबंधन में सहायता मिलेगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
वन संपदा का भविष्य आशाजनक
14 नवंबर, 2006 | विज्ञान
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>