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'परमाणु हमले के प्रभाव से बचाएगा टीका' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में एक ऐसे टीके को विकसित किया जा सकता है जिसे लगाए जाने से परमाणु हमले के प्रभाव से बचा जा सकेगा. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस टीके को आपातकालीन सेवाएं देने वाले लोगों के लिए बनाया जा रहा है. इस ख़ास किस्म के टीके को विकसित करने का काम अमरीका के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में चल रहा है. विश्वविद्यालय में टीके को विकसित करने में लगे शोधकर्ताओं ने एक चूहे पर रेडियोधर्मी विकिरण के प्रभावों का अध्ययन किया है. प्रयोग में पाया गया कि एक ख़ास तरह की जीन थेरेपी यानी उपचार करने के बाद चूहे को रेडियोधर्मी विकिरण के प्रभाव से बचाया जा सकता है. इसके लिए शरीर की प्रत्येक कोशिका में इस उपचार की कुछ मात्रा दी गई. जानकार बताते हैं कि इस तरह के टीके का इस्तेमाल आपालकालीन सेवाओं में लगे लोगों पर किया जा सकता है ताकि किसी परमाणु हमले की स्थिति में उन्हें इसके प्रभावों से बचाया जा सके. यानी अगर किसी हमले में आतंकवादी परमाणु बम या ऐसे बमों का इस्तेमाल करते हैं जिनमें परमाणु विकिरण हों, तो इस हमले का असर आपात सेवाएं से जुड़े लोगों पर नहीं होगा और यह किसी भी ऐसी आपात स्थिति से निबटने के लिए मददगार साबित हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें एड्स के टीके के परीक्षण का दूसरा दौर05 जुलाई, 2005 | विज्ञान आलू से बनेगा हैपेटाइटिस का टीका15 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान एड्स निरोधक टीके का मनुष्यों पर प्रयोग 07 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान मलेरिया के टीके का सफल परीक्षण15 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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