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आलू से बनेगा हैपेटाइटिस का टीका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जिगर की एक बड़ी बीमारी हैपेटाइटिस बी के इलाज के लिए आलू से प्रतिरोधक टीका बनाने की तैयारी चल रही है. अमरीका में बनने जा रहा यह टीका खाने वाली दवाई की शक्ल में आएगा और इसकी क्षमता इंजेक्शन के बराबर ही होगी. जिन आलुओँ से टीका बनाने की बात हो रही है वह जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड है और इसमें इतनी प्रतिरोधक क्षमता है कि टीका विकसित किया जा सके. बफ़ैलो और न्यूयॉर्क में किए गए परीक्षणों से पता चला है कि इन आलुओं से विकसित टीके की प्रतिरोधक क्षमता 60 प्रतिशत है. उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में हैपेटाइटिस बी से हर साल कम से कम 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है. सस्ता नेशनल अकैडमी ऑफ़ साइंस ने कहा है कि खाने की दवा के रुप में यह टीका सभी को सुलभ भी हो सकेगा यानी सस्ता होगा. वैसे हैपेटाइटिस बी का एक टीका इस समय उपलब्ध है जो इंजेक्शन के रुप में है, लेकिन यह बहुत महंगा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि टीका सस्ता होने से पूरी दुनिया के लोग इसका लाभ उठा सकेंगे. यह टीका बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने साधारण आलू का एक पौधा लेकर उसमें हैपेटाइटिस बी का एक प्रोटीन प्रविष्ट कराया जिससे आलू की एक नई प्रजाति विकसित हुई. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में जो भी देश चाहेगा अपने लिए टीके वाले आलू पैदा कर सकेगा. फ़िलहाल अभी इस पर और शोध किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि अभी जिन लोगों पर इसका परीक्षण किया गया है उनको पहले से ही हैपेटाइटिस बी का टीका लगा हुआ था. वैज्ञानिक अब इसे ऐसे लोगों को देकर देखना चाहते हैं जिन्हें पहले यह टीका न लगा हो. |
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