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'लुप्प्त हो सकती हैं कई प्रजातियाँ'
ट्रॉलर
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ का कहना है कि मछली पकड़ने को नियंत्रित नहीं किया जा रहा
पर्यावरण संस्था वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फ़ंड ने एक रिपोर्ट में कहा है कि ज़्यादा मछलियाँ पकड़े जाने के चलते ट्यूना समेत मछलियों की कई प्रजातियाँ लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई हैं.

संस्था ने आरोप लगाया है कि समुद्र में काफ़ी गहराई में रहने वाली मछलियों को पकड़ने पर नियत्रंण रखने का काम जिन संस्थाओं को सौंपा गया है वे इस काम में असफल रही हैं.

संस्था ने सरकारों से आह्वान किया है कि इस तरह मछली पकड़े जाने के ख़िलाफ़ वो क़दम उठाएँ.

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फ़ंड का कहना है कि अगर ज़्यादा मछली पकड़ना बंद भी हो जाता है, तो भी मछलियों की संख्या में गिरावट आएगी क्योंकि विश्व स्तर पर संसाधनों का उचित इस्तेमाल नहीं किया जा रहा.

ऑरेंज रफ़ी जैसी समुद्र में काफ़ी गहराई में वाली मछलियाँ की संख्या में कमी आई है.

समुद्र में रहने वाले जंतुओं पर मंडराते खतरे को देखते हुए जल्द से जल्द क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है
साइमन क्रिप्स

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता मैट मैक्ग्रा के मुताबिक मछलियों को सबसे ज़्यादा खतरा ऐसे समुद्रों में है जो किसी भी देश के राष्ट्रीय कोटे से बाहर हैं और जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समझा जाता है.

इन समुद्रों में मछली पकड़ने पर नज़र रखने का काम क्षेत्रीय प्रबंधन संगठनों का होता है-जिसमें उन देशों के संगठन शामिल होते हैं जिनका समुद्र के पास के इलाक़े में अपना हित जुड़ा हुआ है.

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फ़ंड का कहना है कि ज़्यादातर संगठन अपना काम करने में विफल रहे हैं.

पर्यावरण संस्था के मुताबिक निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद खराब है और विभिन्न देशों की गतिविधियाँ रोकने में क्षेत्रीय संगठन कारगर नहीं है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मल्टीनेशनल कंपनियों के जहाज़ अवैध तरीके से मछली पकड़ते हैं’ और इनसे समुद्र में रहने वाले जंतुओं को काफ़ी खतरा है.

रिपोर्ट के लेखकों ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है वो स्थिति का जायज़ा ले.

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फ़ंड वैश्विक मरीन कार्यक्रम के निदेशक साइमन क्रिप्स ने कहा है कि समुद्र में रहने वाले जंतुओं पर मंडराते खतरे को देखते हुए जल्द से जल्द क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.

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