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शुक्रवार, 07 अक्तूबर, 2005 को 09:09 GMT तक के समाचार
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प्रेम की तलाश में शार्क की मैराथन
शार्क मछली
शार्क पर क़ाबू पाना बहुत मुश्किल है
एक विशाल शार्क मछली ने सिर्फ़ नौ महीनों में दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया जाते हुए पूरा हिंद महासागर पार कर लिया और जैसा कि शोधकर्ताओं का कहना है कि उसने ऐसा शायद प्रेम की तलाश में किया.

शार्क मछली की प्रजाति को लुप्त होने से बचाने के प्रयासों के तहत शोधकर्ताओं ने उस सफ़ेद शार्क पर निशानी लगाई थी.

शोधकर्ताओं ने साइंस नामक पत्रिका में लिखते हुए कहा है कि मछलियों में इतनी लंबी यात्रा मिसाल के क़ाबिल है और सिर्फ़ ट्यूना ही इतनी लंबी यात्रा कर सकती है.

शार्क मछली को निशानी लगाना ही अपने आप में बड़ा और जोखिम भरा काम है क्योंकि उसमें सेटेलाइट उपकरण लगाने के लिए उसे कई आदमी पकड़ते हैं.

इस उपकरण से शार्क का पीछा किया जा सकता है यानी उसके स्थान के बारे में सही-सही पता चल जाता है.

एक मादा शार्क को सेटेलाइट उपकरण लगाया गया और सौभाग्य से कोई वैज्ञानिक इसमें घायल नहीं हुआ.

शोधकर्ता पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि सफ़ेद शार्क कितनी दूर तक टहलती या दौड़ती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका वजूद बनाए रखने के लिए किन उपायों की ज़रूरत है.

बहुत सी शार्क दक्षिण अफ्रीका से मोज़ाम्बीक के जल क्षेत्र तक जा पहुँची जहाँ वे सुरक्षित नहीं हैं.

'प्रेम तलाश'

वैज्ञानिकों ने इस विशाल सफ़ेद शार्क का नाम ऑस्ट्रेलियाई अभिनेत्री निकोल किडमैन के नाम पर निकोल रखा. निकोल किडमैन शार्क को बहुत पसंद करती हैं.

शार्क

न्यूयॉर्क की वन्य जीव संरक्षण सोसायटी के डॉक्टर रमोन बोनफ़िल और उनके दल के सदस्य निकोल शार्क की इस यात्रा को देखकर दंग रह गए.

बोनफ़िल का कहना था, "हमारा अनुमान है कि निकोल शार्क ने प्रजनन कारणों की वजह से इतनी लंबी यात्रा की."

"दक्षिण अफ्रीका में ही शार्कों के खाने के लिए काफ़ी मात्रा उपलब्ध है और अगर वह सिर्फ़ खाने की तलाश में ऑस्ट्रेलिया गई होगी तो उसे अपनी बहुत सी ऊर्जा ख़र्च करनी पड़ी होगी."

बोनफ़िल ने कहा कि शार्क की इतनी लंबी यात्रा की मंशा के बारे में अभी कुछ भी साबित नहीं किया जा सकता, यह सिर्फ़ एक क़यास है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि शार्क की यह यात्रा सीधी थी और उद्देश्यहीन नहीं थी और वह ऑस्ट्रेलिया में कुछ ही समय के लिए रही.

वैज्ञानिकों ने बीस शार्कों की यात्रा पर परीक्षण किया और पाया कि उनमें यह आम आदत है.

वैज्ञानिकों की चिंता ये है कि इस तरह की लंबी यात्रा सफ़ेद शार्कों के वजूद को ख़तरा पैदा कर देती है.

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