| अधिकारियों की ग़लती शार्कों को ले डूबी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में पश्चिम बंगाल के तट से कुछ ही दूर 50 शार्कों की तब मौत हो गई जब उन्हें शिकारियों से बचाने के चक्कर में अधिकारियों ने असावधानी बरती. वन्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि जब अवैध तरीके से ले जाई जा रही शार्कों के बारे में जानकारी मिली तो वे जीवित थीं लेकिन शिकारियों को पकड़ने के चक्कर में शार्क मर गईं. ये शार्क कोलकाता के बड़े होटलों को बेची जाने थीं क्योंकि इसके सुफने (फ़िन्स) से बने भोजन को लोग चाव से खाते हैं. पुलिस ने 19 शिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया है. पुलिस का छापा पुलिस के अनुसार उन्होंने रात को एक नौका की पहचान की जो शार्कों को ले जा रही थी. लेकिन उसके बाद मची अफ़रा-तफ़री में शार्कों को पानी से बाहर निकाल लिया गया. पुलिस के अनुसार शार्कों से भयभीत, छापा मारने वाले अधिकारियों ने शिकारियों से कहा कि वे शार्कों को अपनी नौका से बाहर फेंकें और उन्होंने उन्हें रेत पर फेंक दिया. अधिकारियों का दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया कि शिकारी भाग न पाएँ और ज़रूरी कागज़ी औपचारिकताएँ पूरी की जा सकें. वन्यजीव अधिकारी एम रहमान ने बीबीसी को बताया, "छापा मारने वाले अधिकारियों ने एक ग़लती की. जब छापा मारकर गिरफ़्तारियाँ की गईं तो अधिकारी व्यस्त हो गए और शार्कों को बचाना भूल गए." इन शार्कों का वज़न छह किलो से लेकर 120 किलो तक था. |
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