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एक दूसरे को नाम से बुलाती हैं डॉल्फ़िन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक दिलचस्प शोध के बाद वैज्ञानिकों को पता चला है कि मनुष्यों की तरह डॉल्फ़िन मछलियां भी एक दूसरे को नाम से बुलाती हैं. अमरीकी वैज्ञानिकों के अनुसार डॉल्फ़िन की एक प्रजाति बॉटलनोज़ डॉल्फ़िन एक दूसरे को आवाज़ से पहचान लेती हैं और हर आवाज़ के साथ एक अलग मछली की पहचान जुड़ी होती है. अमरीकी शोधकर्ताओं ने फ्लोरिडा के तट पर तीन साल तक यह शोध किया. सेंट एड्र्यूंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की जिस टीम ने यह शोध किया उसके प्रमुख विनसेंट जानिक बताते हैं कि पहले तो डॉल्फ़िनों को पकड़ा गया और फिर उन्हें पानी में रखकर उनकी सीटियों की आवाज़ें रिकॉर्ड की गईं. वैज्ञानिकों ने इन सीटियों की आवाज़ें रिकार्ड कर कंप्यूटर के ज़रिए ऐसी आवाज़ें बनाईं जो डॉल्फ़िनों की आवाज़ों से मिलती थीं. जब ये आवाज़ अन्य बॉटलनोज़ डॉल्फ़िनों को सुनाई गईं तो पाया गया कि वे इन आवाज़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं. वैज्ञानिक कहते हैं कि इससे पता चलता है कि डॉल्फ़िन एक विशेष किस्म की सीटी से दूसरी डॉल्फ़िन की पहचान करती हैं. मतलब ये कि उनकी भी इंसानों की तरह पहचान होती है और वो भी एक-दूसरे को नाम से बुलाती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बहुत उत्साहजनक खोज है, जिससे स्पष्ट होता है कि डॉल्फ़िनों ने भी इंसानों जैसी क्षमताएँ विकसित कर ली हैं. जानिक कहते हैं, "इससे पता चलता है कि मनुष्यों की तरह जानवरों का भी विकास हो रहा है." वैज्ञानिकों की यह खोज अमरीकी पत्रिका नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज में छपी है. | इससे जुड़ी ख़बरें गंगा की डॉल्फ़िनों का संरक्षण06 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना डॉल्फ़िनें और बारूदी सुरंगें27 मार्च, 2003 | पहला पन्ना धूम्रपान की काट मछली?07 जनवरी, 2003 | विज्ञान मछली को दर्द होता है?30 अप्रैल, 2003 | विज्ञान दुनिया की 'पहली' रोबो-मछली06 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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