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त्वचा का रंग अलग अलग क्यों? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनुष्यों की त्वचा की रंग आख़िर अलग अलग क्यों होता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़ेबराफ़िश के बारे में जो अध्ययन किया गया है उससे इस राज़ पर से पर्दा उठ सकता है. पेन स्टेट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध के मुताबिक़, एक ख़ास तरह के जीन में अगर थोड़ा सा भी बदलाव किया जाए तो इससे त्वचा के रंग के बारे में काफ़ी कुछ पता चलाया जा सकता है. और ज़ेबराफ़िश में ऐसे कई जीन हैं जो मनुष्यों के जीन से मिलते जुलते हैं. उम्मीद की जा रही है कि ज़ेबराफ़िश पर अध्ययन के बाद, त्वचा का रंग बदलने के लिए नए तरीके भी सामने आ सकते हैं. तब शायद न तो टैनिंग की ज़रूरत पड़े और न ही रंग बदलने के लिए रसायनों के इस्तेमाल की. त्वचा के रंग के लिए कौन कौन से जीन ज़िम्मेदार हैं, इसे लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं. लेकिन इस बारे में पता नहीं चल पाया है. इन जीनों में बदलाव से कई तरह की बीमारियाँ भी होती हैं. उम्मीद ये भी है कि नए शोध से त्वचा कैंसर के इलाज के नए तरीके भी निकल कर आएँगे. ब्रिटन कैंसर रिसर्च के डॉक्टर एम्मा नाइट कहते हैं कि ज़ेबराफ़िश पर किए अध्ययन से जो तथ्य सामने आएँ हैं वो रोचक तो हैं लेकिन अभी किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें पहली बार हुआ चेहरे का प्रतिरोपण01 दिसंबर, 2005 | विज्ञान त्वचा के एक टुकड़े से बनाया पूरा चेहरा13 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान क्या बदल सकता है चेहरा भी?03 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान हाथ मिलाने से ही रोग का पता 07 जुलाई, 2004 | विज्ञान गोदना गुदवाने से पहले...18 जुलाई, 2003 | विज्ञान नर्म त्वचा का राज़...07 मई, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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