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शुक्र की कक्षा में मिलेगा नया ज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय अंतरिक्ष यान वीनस एक्सप्रेस ऑर्बिटर शुक्र ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया है. यह शुक्र की कक्षा में भेजा जाने वाला पहला यूरोपीय अंतरिक्ष यान है. वीनस एक्सप्रेस दो वर्ष तक शुक्र ग्रह के वातावरण का अध्ययन करेगा. माना जा रहा है वीनस एक्सप्रेस का कठिन दौर अब ख़त्म हो गया है और अब असली अध्ययन का समय शुरू हो रहा है. वीनस अब कक्षा में स्थापित हो गया है और सबसे पहला काम यह होगा कि उसके सारे उपकरणों को आज़माकर देखा जाए. एक महीने के भीतर धरती पर बैठे वैज्ञानिकों को शुक्र ग्रह के बेहद गर्म वातावरण के बारे में जानकारी मिलने लगेगी. मंगलवार को वैज्ञानिकों ने वीनस एक्सप्रेस का इंजन बंद कर दिया ताकि वह शुक्र ग्रह के वातावरण से बाहर न चला जाए, इसके बाद शुक्र ग्रह के गुरूत्वाकर्षण ने वीनस एक्सप्रेस को अपनी कक्षा में खींच लिया. पृथ्वी का 'जुड़वाँ' शुक्र ग्रह आकार में लगभग पृथ्वी के ही बराबर है और समझा जाता है कि उसकी संरचना भी पृथ्वी के ही समान है लेकिन यह समानता बस यहीं रुक जाती है.
शुक्र की सतह पर कॉर्बन डाइऑक्साइड की घनी परत है जो अंदर आने वाले सूर्य किरणों को अपने में सोख लेती है जिससे उसकी सतह का औसत तापमान 467 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. सतह का दबाव पृथ्वी के मुक़ाबले क़रीब 90 गुना ज़्यादा है. इस पूरे अभियान का उद्देश्य यह जानना है कि शुक्र धरती से काफ़ी मिलता-जुलता ग्रह होने के बावजूद इतना भिन्न क्यों है. दोनों ग्रहों की समानताओं और भिन्नताओं के बारे में अध्ययन करके वैज्ञानिक धरती के बारे में अपनी समझ को और साफ़ कर सकेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें यूरोप का 'गैलीलियो' उपग्रह प्रक्षेपित 28 दिसंबर, 2005 | विज्ञान प्लूटो अभियान पर ख़राब मौसम की मार17 जनवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो अभियान एक बार फिर स्थगित18 जनवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना19 जनवरी, 2006 | विज्ञान नासा यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचा11 मार्च, 2006 | विज्ञान इनसैट-4ए का सफल प्रक्षेपण22 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मंगल ग्रह धरती के क़रीब आया29 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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