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पेंटागन शार्कों को जासूस बनाएगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ब्रितानी पत्रिका ने ख़बर दी है कि अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के वैज्ञानिक शार्क मछलियों को ऐसे जासूस में परिवर्तित करने पर काम कर रहे हैं जो बिना नज़र में आए जहाज़ों का पीछा करने में सक्षम हो सकती हैं. न्यू साइंटिस्ट पत्रिका ने कहा है कि ये वैज्ञानिक इन शार्क मछलियों को रिमोट कंट्रोल से चलाने की योजना बना रहे हैं जिसके लिए शार्कों के मस्तिष्क में उपकरण लगाए जाएंगे. न्यू साइंटिस्ट का कहाना है कि इस परियोजना का उद्देश्य पानी में तेज़ी से चलने की शार्कों की प्राकृतिक प्रतिभा का फ़ायदा उठाना है. पत्रिका का कहना है कि यह असाधारण परियोजना पिछले सप्ताह हवाई में जारी की गई. इस शोध परियोजना को पेंटागन आर्थिक सहायता दे रहा है. पत्रिका का कहना है कि इस परियोजना के तहत शार्कों के दिमाग़ में ऐसे उपकरण लगाए जाएंगे जिनके ज़रिए उन्हें निर्देशित किया जा सकता है. इस तरह के उपकरण पहले भी मछलियों, चूहों और बंदरों में लगाकर देखे जा चुके हैं. अब पेंटागन के वैज्ञानिकों के लिए अगला क़दम होगा इस तरह के उपकरणों से नियंत्रित नीले रंग के शार्कों को फ्लोरिडा के तट पर समुद्र में छोड़ना. चूँकि रेडियो सिगनल समुद्र के पानी में भी अच्छी तरह प्रसारित होते हैं इसलिए शार्कों के साथ संचार संपर्क तेज़ी से हो सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें तैराकों के पीछे पड़ गई शार्क06 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना शार्कों ने एक महिला को मार डाला08 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना प्रेम की तलाश में शार्क की मैराथन07 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान अधिकारियों की ग़लती शार्कों को ले डूबी19 मई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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